मनरेगा मजदूरों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य, जॉब कार्ड होंगे रद्द
सिवान जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने वाले सभी मजदूरों के लिए ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य मनरेगा योजना के तहत एक ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करना और मास्टर रोल को अधिक सटीक बनाना है। विभाग द्वारा इस दिशा में कवायदें तेज कर दी गई हैं।
योजना में पारदर्शिता लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे, ई-केवाईसी को एक अहम उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से मजदूरों की पहचान को आधार कार्ड से सत्यापित किया जाएगा। इसके लिए यूडीआई, मनरेगा और ई-केवाइसी नामक एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो कार्यस्थल पर ही मजदूरों के ई-केवाईसी को संभव बनाएगा।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के अनुसार, ऐप में पहले मजदूर की आईडी अपलोड की जाएगी, जिसके बाद आधार नंबर दर्ज करके लगभग 30 सेकंड तक फेस स्कैनिंग के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने पर संबंधित मजदूर का ई-केवाईसी पूर्ण माना जाएगा।
ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने से न केवल मजदूरों को काम उपलब्ध कराने में सहूलियत होगी, बल्कि उनकी मजदूरी का भुगतान भी सीधे उनके बैंक खातों में आसानी से किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, काम के दौरान मजदूरों का सत्यापन भी सुगमता से हो सकेगा, जिससे धांधली की संभावना कम होगी।
ग्रामीण विकास विभाग ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से इस ई-केवाईसी कार्य को पूरा कराने में सक्रिय सहयोग की अपील की है, ताकि कोई भी मनरेगा मजदूर इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मजदूरों का ई-केवाईसी पूरा नहीं होगा, उनके जॉब कार्ड को रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए मनरेगा पीआरएस की तैनाती की गई है और उन्हें मजदूरों की सूची भी उपलब्ध करा दी गई है। मैट और बीएफटी को भी इस जिम्मेदारी को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल मनरेगा योजना को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
