मनरेगा में 50 दिन अतिरिक्त रोजगार, जम्मू-कश्मीर को केंद्र का तोहफा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मनरेगा योजना के तहत राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 50 दिनों के अतिरिक्त रोजगार की मंजूरी पर केंद्र सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण कदम प्रदेश के कमजोर समुदायों को आर्थिक संकट से उबरने में सहायता करेगा और उनकी आजीविका को सुरक्षित करेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री जाविद अहमद डार और उनकी टीम को भी बधाई दी, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मनरेगा के तहत अतिरिक्त 50 दिनों के रोजगार को मंजूरी दिलाने में सफलतापूर्वक प्रयास किए।
यह निर्णय विशेष रूप से उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जो हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुए थे। अतिरिक्त रोजगार के अवसर प्रदान करके, यह कदम उन्हें बेहतर आजीविका के साधन और समय पर सहायता सुनिश्चित करेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जम्मू-कश्मीर में प्रभावित परिवारों के लिए मनरेगा कार्य सीमा को औपचारिक रूप से 100 दिनों से बढ़ाकर 150 दिन कर दिया है। यह निर्णय 1962 पंचायतों को बाढ़ प्रभावित घोषित किए जाने के बाद लिया गया है, जो इस क्षेत्र की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
प्रदेश प्रशासन ने कृषि गतिविधियों और ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को दूर करने के लिए विशेष राहत की मांग की थी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने भी इस विस्तार की सिफारिश की थी, जिसका उद्देश्य सबसे कमजोर परिवारों को स्थिर आय सृजन, आर्थिक कठिनाइयों में कमी और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण में सक्षम बनाना है।
यह अतिरिक्त रोजगार सहायता संशोधित प्रबंधन प्रोटोकाल और राष्ट्रीय एमआईएस प्रणाली नरेगासाफ्ट के माध्यम से उन्नत निगरानी के साथ क्रियान्वित की जाएगी। नरेगासाफ्ट को अतिरिक्त कार्यदिवसों को रिकॉर्ड करने के लिए अपडेट किया जा रहा है, जिससे इस योजना का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके। यह कदम जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण विकास और आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
