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महाराजगंज: नहर पटरी पर पेड़ से लटका मिला युवक का शव, प्रेम-प्रसंग का शक

By Dec 8, 2025

महाराजगंज। सिंदुरिया थाना क्षेत्र के विश्वनाथपुर पड़वनिया गांव निवासी शेषमणि उर्फ भीम यादव का शव गुरुवार रात घर से लापता होने के बाद शुक्रवार सुबह बसंतपुर खुर्द के समीप देवरिया शाखा नहर पटरी पर एक पेड़ से संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे के सहारे लटका मिला। पुलिस की अब तक की जांच में युवक के इंस्टाग्राम अकाउंट पर बेवफाई से जुड़े गाने और रील मिलने के बाद प्रेम-प्रसंग की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, शेषमणि उर्फ भीम यादव गुरुवार रात भोजन के बाद अपने कमरे में सोने चला गया था। रात करीब 11.30 बजे वह बाहर निकला और स्वजन से कहा कि थोड़ी देर में आ रहा है। इसके बाद स्वजन सो गए। शुक्रवार सुबह जब वह घर पर नहीं मिला तो स्वजन की चिंता बढ़ गई। उसे खोजने के लिए निकले। इसी बीच, रोज की तरह सुबह नहर की तरफ टहलने गए लोगों की नजर पेड़ पर फंदे के सहारे लटके शव पर पड़ी तो हड़कंप मच गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फारेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को पेड़ से नीचे उतरवाया। स्वजन ने उसकी पहचान शेषमणि उर्फ भीम यादव के रूप में की। जांच में पुलिस को मौके से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन युवक की इंटरनेट मीडिया की गतिविधियों ने मामले को और उलझा दिया है।

सिंदुरिया थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि प्राथमिक तौर पर यह मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। युवक के इंस्टाग्राम पर एक रील मिली है, जिसमें वह भावनात्मक तनाव में दिख रहा है। पुलिस सभी तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और इंटरनेट मीडिया की गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है।

पुलिस को प्रारंभिक जांच में पता चला कि शेषमणि के इंस्टाग्राम आईडी पर पिछले कई दिनों से एक युवती और उससे जुड़े वीडियो के साथ ही बेवफाई पर आधारित गाने पोस्ट किए जा रहे थे। एक रील में अंतिम शब्द थे— “तेरे बिन अकेले मौत हुआ जान”, जिसने घटना को और रहस्यमय बना दिया है। पुलिस इन पोस्ट्स को घटना से जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।

शेषमणि चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके बड़े भाई राजमंगल, राजू और दूधनाथ यादव हैं। पिता सुदामा यादव किसान हैं और मां सीमा देवी गृहणी हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। घटना की सूचना मिलते ही स्वजन बदहवास हो गए और घर में कोहराम मच गया। परिवार के अनुसार, शेषमणि ने स्नातक तक पढ़ाई की थी, लेकिन नौकरी न मिलने पर वह पिता के साथ घर-परिवार और खेती-बाड़ी का काम करता था। परिवार ने अभी तक किसी पर संदेह व्यक्त नहीं किया है।

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