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महावतार नरसिम्हा ऑस्कर 2026 की दौड़ में शामिल, 300 फिल्मों से होगा मुकाबला

By Nov 23, 2025

दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने और दर्शकों का दिल जीतने वाली अश्विन कुमार द्वारा निर्देशित एनिमेटेड फीचर फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ अब ऑस्कर 2026 की प्रतिष्ठित दौड़ में शामिल हो गई है। इस फिल्म ने आधिकारिक तौर पर 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स की एलिजिबिलिटी लिस्ट में अपना स्थान पक्का कर लिया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है, जहाँ ‘महावतार नरसिम्हा’ का मुकाबला ‘K-Pop डेमन हंटर्स’, ‘ज़ूटोपिया 2’, और ‘डेमन स्लेयर: किमेत्सु नो याइबा इनफिनिटी कैसल’ जैसी वैश्विक स्तर की एनिमेटेड फिल्मों से होगा।

एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के नियमों के अनुसार, बेस्ट एनिमेटेड फीचर श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने के लिए फिल्म का 40 मिनट से अधिक लंबा होना, कम से कम 75% रनटाइम एनिमेशन का होना, और संयुक्त राज्य अमेरिका में एक क्वालिफाइंग थिएट्रिकल रिलीज होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, फिल्म को छह निर्दिष्ट मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में से किसी एक में लगातार सात दिनों तक सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। हालिया नियमों में हुए बदलाव के तहत, अब पात्र एनिमेटेड फीचर फिल्मों को बेस्ट एनिमेटेड फीचर के साथ-साथ बेस्ट इंटरनेशनल फीचर श्रेणी के लिए भी सबमिट किया जा सकता है, एक ऐसा मानदंड जिसे ‘महावतार नरसिम्हा’ ने सफलतापूर्वक पूरा किया है।

98वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए पात्र फिल्मों की सूची में ‘आर्को’, ‘द बैड गाइज 2’, ‘चेनसॉ मैन – द मूवी: रेज आर्क’, ‘डॉग ऑफ गॉड’, ‘एलियो’, ‘गैबीज डॉलहाउस: द मूवी’, ‘लाइट ऑफ द वर्ल्ड’, और ‘द ट्विट्स’ जैसी विविध एनिमेटेड और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाएं शामिल हैं।

‘महावतार नरसिम्हा’ को एक विशाल फ्रेंचाइजी के पहले भाग के रूप में तैयार किया गया है। भविष्य में ‘महावतार परशुराम’ (2027), ‘महावतार रघुनंदन’ (2029), ‘महावतार द्वारकाधीश’ (2031), ‘महावतार गोकुलानंद’ (2033), और दो भागों वाली ‘महावतार कल्कि’ (2035 और 2037) जैसी फिल्में इस एनिमेटेड ब्रह्मांड का विस्तार करेंगी।

निर्देशक अश्विन कुमार ने इस फ्रेंचाइजी को हॉलीवुड सुपरहीरो फिल्मों के भारतीय विकल्प के रूप में वर्णित किया है। उन्होंने कहा था कि यह फ्रैंचाइजी भारतीय दर्शकों और प्रवासी समुदाय के लिए एक खास मुकाम हासिल करेगी। हालांकि बजट की कमी के कारण वे अभी हॉलीवुड के स्तर पर नहीं हैं, उनका मानना है कि भारत के ‘जुगाड़’ सिस्टम और समस्या-समाधान की क्षमता के बल पर वे निश्चित रूप से उस स्तर तक पहुंचेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि सातवीं फिल्म तक वे इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।

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