माघी पूर्णिमा 1 फरवरी को: जानें स्नान-दान का महत्व और शुभ मुहूर्त
स्नान, दान व यज्ञ का पर्व माघी पूर्णिमा इस वर्ष एक फरवरी को मनाई जाएगी। माघ मास की पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर देवतागण तीर्थराज प्रयाग में गंगा स्नान के लिए पधारते हैं। इसी दिन माघ स्नान का अंतिम स्नान संपन्न होता है और कल्पवास का समापन होता है।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, माघी पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी, सरोवर या तट पर स्नान करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस अवसर पर गाय, तिल, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न और कम्बल जैसी वस्तुओं का दान करना शुभ फलदायी होता है। भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और पितरों का श्राद्ध करना भी इस दिन विशेष महत्व रखता है।
मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन प्रात: काल में किया गया स्नान सभी प्रकार के रोगों का नाश करता है। इस वर्ष माघी पूर्णिमा पर प्रीति योग, आयुष्मान योग, पुष्य नक्षत्र, रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। माघ पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ एक फरवरी की सुबह 5:52 बजे होगा और इसका समापन दो फरवरी की सुबह 3:38 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, माघी पूर्णिमा का मुख्य पर्व एक फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस पर्व का सीधा संबंध धार्मिक आस्थाओं और आध्यात्मिक शुद्धि से है, जो लोगों को मानसिक शांति और पुण्य लाभ प्रदान करता है।
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