मेरठ में वायु प्रदूषण गंभीर, पल्लवपुरम-जयभीमनगर में AQI 390 के पार
मेरठ में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक सीमा को पार कर रहा है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। शाम सात बजे जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पल्लवपुरम में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 396 और जयभीमनगर में 395 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी से भी ऊपर है और तत्काल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को आमंत्रित कर सकता है।
सुबह से दोपहर तक, विशेष रूप से PM 2.5 कणों की सघनता 415 से 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक रही, जो सामान्य मानक से कई गुना अधिक है। ये सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र में गहराई तक प्रवेश कर फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। दोपहर के समय ओजोन का स्तर भी 170 के पार पहुंच गया, जिसे ‘खराब’ श्रेणी में गिना जाता है। रात के समय कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक स्तर पर पाई गई, जो बंद स्थानों में और भी अधिक खतरनाक हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, रात में नमी का उच्च प्रतिशत (शनिवार को 91% तक) बना हुआ है। अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मेरठ कॉलेज के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कंचन सिंह के अनुसार, ठंड के मौसम में वायु दबाव अधिक होने के कारण प्रदूषित कण जमीन की सतह के करीब जमा हो जाते हैं, जिससे प्रदूषण का प्रभाव बढ़ जाता है।
मेरठ फोरम फॉर क्लीन एयर के अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि दूषित हवा का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है, लेकिन यह आंखें, त्वचा, हृदय और मस्तिष्क को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बचाव के उपाय के तौर पर अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संदीप जैन ने आहार संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि कार्बोहाइड्रेट और शर्करा की जगह भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए। साथ ही, एंटी ऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन आवश्यक है, क्योंकि ये कोशिकाओं को प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। वायु प्रदूषण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सावधानी बरतना और सरकारी निर्देशों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
