मेरठ में हवा हुई जहरीली, सांस लेना मुश्किल; प्रदूषण मानक से 33 गुना अधिक
मेरठ में सर्दी की दस्तक के साथ ही हवा की गुणवत्ता जानलेवा स्तर पर पहुंच गई है। गिरते तापमान के कारण वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। शनिवार को पल्लवपुरम में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) दोपहर एक बजे 391 दर्ज किया गया, जबकि जयभीमनगर में यह 381 रहा, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक स्थिति का संकेत है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुरक्षित मानक से 10 गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक से 33 गुना अधिक प्रदूषित हवा में सांस लेना मेरठवासियों के लिए चुनौती बन गया है। शुक्रवार रात नौ बजे से शनिवार दोपहर एक बजे तक पीएम 2.5 का मान 410 से अधिक बना रहा, और सुबह आठ बजे से 11 बजे तक तो यह उच्चतम सीमा 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। यह वही समय होता है जब बच्चे स्कूल जाते हैं और लोग अपने कामकाज के लिए घरों से बाहर निकलते हैं, जिससे उन पर प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। मेरठ प्रदेश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जिसके पहले चार शहर भी एनसीआर क्षेत्र के हैं।
शुक्रवार की रात इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही, जब न्यूनतम तापमान 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.4 डिग्री कम था। अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेंटीग्रेड रहा। रात में आर्द्रता का प्रतिशत 88 तक पहुंच गया, जबकि हवा की रफ्तार कम बनी हुई है, जिससे सुबह के समय धुंध छाई रही। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानी प्रोफेसर यूपी शाही ने बताया कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान सामान्य से दो से चार डिग्री कम बना रहेगा। बरसात की संभावना न होने के कारण प्रदूषण या स्मॉग से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
विशेषज्ञों ने लोगों को बिना मास्क लगाए बाहर न निकलने और कुछ दिनों के लिए सुबह की सैर बंद करने की सलाह दी है। पांच नवंबर से रात के तापमान में गिरावट के साथ ही हवा जहरीली होती जा रही है। दोपहर बाद थोड़ी राहत मिली, लेकिन शाम आठ बजे के बाद पल्लवपुरम और जयभीमनगर में हवा की स्थिति फिर खराब होनी शुरू हो गई, और अति सूक्ष्म कणों की सांद्रता 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के पार पहुंच गई। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आम जनता दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
