मेरठ बनेगा महाभारतकालीन हस्तिनापुर का प्रवेश द्वार, शहर को मिलेगा नया स्वरूप
मेरठ, जो कि महाभारतकालीन हस्तिनापुर के इतने करीब स्थित है, जल्द ही अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को और अधिक जीवंत रूप से प्रदर्शित करेगा। एक विशेष पहल के तहत, साकेत चौराहे से हस्तिनापुर तक के पूरे मार्ग को एक आकर्षक कारिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शहर में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को महाभारत, जैन और सिख धर्म से जुड़े गौरवशाली इतिहास की याद दिलाना है। कमिश्नर भानुचंद्र गोस्वामी ने इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान में इस प्रस्ताव को शामिल कराया है, जिस पर मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) काम करेगा।
कमिश्नर ने विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में शहर में ऐसे कोई विशिष्ट चिह्न या प्रतीक नहीं हैं जो हस्तिनापुर की निकटता का अहसास करा सकें। उन्होंने कहा कि इस कारिडोर के निर्माण से न केवल मेरठ की पहचान मजबूत होगी, बल्कि यह प्रदेश सरकार के महाभारत और जैन सर्किट का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा, जो अभी तक अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है।
इस परियोजना के तहत, मार्ग के विभिन्न हिस्सों पर ऐतिहासिक महत्व के प्रतीकों को स्थापित किया जाएगा। साथ ही, शहर के भीतर डिजिटल बोर्ड और शिलापट लगाए जाएंगे, जो आगंतुकों को हस्तिनापुर के इतिहास और महत्व से अवगत कराएंगे। यह पहल मेरठ को एक ऐसे शहर के रूप में स्थापित करेगी जहां इतिहास और आधुनिकता का संगम देखने को मिलेगा।
योजना के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, शहर के घंटाघर क्षेत्र को भव्यता प्रदान की जाएगी। लखनऊ के हजरतगंज की तर्ज पर, घंटाघर और उसके आसपास के इलाके का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसमें सड़कों को चौड़ा करना, फुटपाथ का निर्माण, रेलिंग, बेंच, आकर्षक स्ट्रीट लाइटें, और निर्धारित स्थानों पर डस्टबिन व ऑटो स्टैंड शामिल हैं। दुकानों के बोर्ड भी एक समान डिजाइन और रंग में होंगे, जिससे क्षेत्र की सुंदरता बढ़ेगी। घंटाघर को विशेष फसाड लाइट से रोशन किया जाएगा, जिससे इसकी ऐतिहासिकता और निखर कर सामने आएगी।
इसके अतिरिक्त, कमिश्नर ने शहर में सड़क निर्माण और डिवाइडर के एकरूपता पर भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को सड़क और डिवाइडर निर्माण में एक समान डिजाइन, रंग और चौड़ाई का पालन करना चाहिए। सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्यों में सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें एनसीआरटीसी की तर्ज पर टिन की दीवारें लगाकर कार्य करना, रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव और सामग्री का सुव्यवस्थित रखरखाव शामिल है। इन सभी पहलों से मेरठ न केवल एक ऐतिहासिक शहर के रूप में उभरेगा, बल्कि पर्यटकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य भी बनेगा।
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