मेरठ बनेगा खेल सामग्री और खिलाड़ियों का वैश्विक हब, सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
भारत में वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की संभावनाओं के बीच, केंद्र सरकार ने मेरठ को खेल और खिलाड़ी उत्पादों के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य न केवल खेल सामग्री उद्योग को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, रोजगार के अवसर पैदा करना और युवा खेल प्रतिभाओं को पोषित करना भी है।
इसी लक्ष्य को लेकर शुक्रवार को होटल अशोका में “भारत का मॉडल स्पोर्ट्स हब-स्पोर्टएज मेरठ” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने “स्पोर्टएज मेरठ” (विकास एवं उत्कृष्टता के लिए खेल एवं उद्यमिता विकास) के अंतर्गत मेरठ स्पोर्ट्स हब विकास मॉडल की घोषणा की। यह आयोजन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, एसपीईएफएल कौशल परिषद और ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि स्पोर्टएज मेरठ पहल से क्षेत्र में आजीविका के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा, महिला उद्यमियों को सशक्त बनाया जाएगा और युवा खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए, मेरठ को खिलाड़ी और खेल उत्पाद का हब बनाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए खेल उद्योग के कर्मचारियों के कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ खिलाड़ियों और कोच का भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। ग्रामीण स्तर पर अत्याधुनिक स्टेडियमों का निर्माण भी इस योजना का हिस्सा है।
कार्यशाला में सरकार, उद्योग, वित्त और विकास क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें एशियाई विकास बैंक (एडीबी), विश्व बैंक, ओएनजीसी फाउंडेशन, माइक्रोसाफ्ट, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन और एसबीआई फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यक्रम में बताया गया कि मेरठ जिला वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 1500 करोड़ रुपये का योगदान देता है और भारत के खेल सामग्री निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखता है। इस क्लस्टर में तीन लाख से अधिक कारीगर, महिला कर्मचारी और छोटे उद्यमी कार्यरत हैं, जिनकी कारीगरी ने मेरठ को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।
स्पोर्टएज मेरठ के माध्यम से, इस इको-सिस्टम का लक्ष्य प्रतिस्पर्धात्मकता, नवोन्मेषण और सामाजिक प्रभाव के लिए एक वैश्विक मानक के रूप में स्थापित करना है। भारत के तीसरे सबसे बड़े खेल सामग्री निर्यातक के रूप में मेरठ की विरासत को मजबूत करने के लिए, यह मॉडल उद्यमिता को बढ़ावा देगा और एमएसएमई तथा स्टार्टअप्स को नवाचार करने व नई तकनीकों को अपनाने में सक्षम बनाएगा।
इस पहल को गति देते हुए, केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी 29 नवंबर को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित कौशल विकास केंद्र का शुभारंभ करेंगे। यह केंद्र महिलाओं द्वारा संचालित है और यहां बैडमिंटन शटलकॉक के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी दिन मंत्री खेल उत्पाद उद्यमियों, खेल क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों, खिलाड़ियों और कोचों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को और बल मिलेगा।
