मेक्सिको में जेन Z का आक्रोश: अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर युवा
मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में शनिवार को हजारों युवाओं ने अपराध, भ्रष्टाचार और अपराधों को माफ किए जाने के खिलाफ एक विशाल प्रदर्शन किया। ‘जेन Z’ नामक संगठन के बैनर तले निकले इस जुलूस ने पूरे शहर में शांतिपूर्ण तरीके से मार्च किया, लेकिन अंतिम मुकाम पर पहुंचने से कुछ ही मिनट पहले स्थिति हिंसक हो गई।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव में युवाओं ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों, पटाखों, डंडों और स्टील चेन से हमला किया। जवाब में, पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। राजधानी के सुरक्षा प्रमुख के अनुसार, इस हिंसा में कुल 120 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 100 पुलिसकर्मी थे। यह घटना युवाओं के एक वर्ग की पूर्व तैयारी को भी दर्शाती है।
युवाओं ने सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अपराधों को माफ किए जाने के सिलसिले में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने देश में बेहतर कानून व्यवस्था और सुरक्षा की मांग की। कारोबारी मामलों के सलाहकार 29 वर्षीय एंड्रेस मासा ने कहा, “हमें हर क्षेत्र में ज्यादा सुरक्षा चाहिए जिससे हम मेहनत कर अपेक्षित परिणाम प्राप्त कर सकें।” वहीं, 43 वर्षीय डॉक्टर एरिजबेथ गार्सिया ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अधिक धन खर्च करने और कानून व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा हो सके।
इस प्रदर्शन को पूर्व राष्ट्रपति विसेंट फाक्स और अरबपति कारोबारी रिकार्डो सेलिनास सहित कई बुजुर्गों और विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था। राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबाउम ने इस घटना के बाद विपक्ष पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने इससे पहले भी दक्षिणपंथी दलों पर ऐसे ही आरोप लगाए थे, और शनिवार के प्रदर्शन को उसी का परिणाम माना जा रहा है।
हाल के वर्षों में, कई देशों में युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों ने सरकारों में बदलाव लाए हैं, जैसा कि श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में देखा गया है। मेक्सिको में भी, मिशोआकन शहर के मेयर कार्लोस मैंजो सहित कई चर्चित लोगों की हालिया हत्याओं के बावजूद राष्ट्रपति शेनबाउम की लोकप्रियता में कमी नहीं आई है, लेकिन युवाओं का यह आक्रोश सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। यह प्रदर्शन देश में व्याप्त सामाजिक-राजनीतिक तनाव को उजागर करता है और सरकार पर कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करने का दबाव बढ़ाता है।
