एमडीडीए के नोटिस से देहरादून की बस्तियों में हड़कंप, बुलडोजर का खतरा मंडराया
देहरादून में एमडीडीए (मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा तरला नागल और ढाकपट्टी बस्तियों में अवैध निर्माणों को हटाने के नोटिस के बाद स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया है। इन बस्तियों के हजारों परिवार बेघर होने के डर से सहमे हुए हैं। इस चिंता के चलते बुधवार को बड़ी संख्या में बस्तीवासी विपक्षी दलों के नेताओं के नेतृत्व में नगर निगम पहुंचे और महापौर सौरभ थपलियाल से मदद की गुहार लगाई।
नगर निगम परिसर में हंगामा करते हुए बस्तीवासियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि उनके घरों को उजाड़ा जा रहा है। काफी देर चले हंगामे के बाद, बस्तीवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल महापौर से मिला। उन्होंने एमडीडीए का नोटिस दिखाते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने का आग्रह किया। इस पर महापौर सौरभ थपलियाल स्वयं अपने कक्ष से बाहर आकर बस्तीवासियों के बीच पहुंचे और उन्होंने इस गंभीर मामले पर एमडीडीए के अधिकारियों तथा शहरी विकास मंत्री के साथ वार्ता कर उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया। महापौर के आश्वासन के बाद बस्तीवासी शांत होकर लौट गए।
यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। रिस्पना नदी के अधिसूचित बाढ़ परिक्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। एमडीडीए ने इन बस्तियों के निवासियों को औपचारिक नोटिस जारी कर अवैध निर्माणों की पहचान, सत्यापन और पुनर्वास से जुड़ी कार्रवाई की जानकारी दी है।
उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि रिस्पना नदी के किनारे बाढ़ परिक्षेत्र में किए गए किसी भी नियम-विरुद्ध निर्माण को तुरंत हटाया जाना अनिवार्य है। इस आदेश के अनुपालन के लिए जिलाधिकारी देहरादून ने नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जिसमें पुलिस अधीक्षक शहर, सचिव एमडीडीए, उप जिलाधिकारी सदर और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शामिल हैं।
इस समिति को प्रभावित परिवारों के सर्वे, उनकी पात्रता निर्धारण और पुनर्वास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम, राजस्व, पुलिस और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीमों ने विद्युत बिल, गैस कनेक्शन और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर निवासियों की पात्रता का सत्यापन किया। सर्वे में पाया गया कि कुछ परिवार 11 मार्च 2016 से पूर्व से यहां रह रहे हैं और उनके निर्माण शासनादेश के अनुसार एमडीडीए को हस्तांतरित भूमि पर बने हैं। ऐसे पात्र परिवारों को काठबंगला में नगर निगम द्वारा निर्मित ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में पुनर्वासित करने की योजना है। हालांकि, अदालत के आदेशों के अनुसार, जिन निर्माणों को अवैध पाया जाएगा, उन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा।
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