मात्र 368 रुपये में स्टिंग बग से लीची सुरक्षित, सरकार की सामूहिक पहल
मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। लीची किसानों के लिए राहत भरी खबर है। स्टिंग बग कीट के प्रकोप से लीची के बागों को बचाने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ी सामूहिक पहल की है। इस योजना के तहत मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर और मुशहरी प्रखंड में लीची के बागों का चयन किया गया है, जहां सामूहिक स्तर पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाएगा। यह कदम किसानों को कीटों से होने वाले भारी नुकसान से बचाने और लीची की गुणवत्ता व उपज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पहले चरण में सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के 30 हजार लीची पेड़ों पर कीटनाशी दवा का छिड़काव किया जाएगा। पौधा संरक्षण विभाग ने इस अभियान की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। सरकार कुल छिड़काव खर्च का 70 प्रतिशत वहन करेगी, जबकि किसानों को केवल 30 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा। लीची के पेड़ों पर दो बार छिड़काव किया जाएगा, जिसके लिए किसानों को पहले छिड़काव के लिए 216 रुपये और दूसरे के लिए 152 रुपये, यानी कुल 368 रुपये देने होंगे।
जिला पौधा संरक्षण पदाधिकारी चंद्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने मीनापुर और मुशहरी के बागों का निरीक्षण किया, जहां किसानों ने व्यक्तिगत स्तर पर कीट प्रबंधन की अक्षमता की शिकायत की थी। किसानों के अनुसार, केवल एक बाग में छिड़काव से स्थायी लाभ नहीं मिल रहा था, जिसके चलते सामूहिक पहल की आवश्यकता महसूस की गई। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह सामूहिक छिड़काव अभियान शुरू किया है। इस वर्ष लीची के अलावा आम के 20 हजार, अमरूद के एक हजार, केला के 20 हजार हेक्टेयर और पपीता के दो हेक्टेयर पेड़ों पर भी छिड़काव का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आम के लिए पहले छिड़काव की दर 79 रुपये और दूसरे की 96 रुपये तय की गई है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत बागवानी फसलों में कीट प्रबंधन योजना के लिए 11 करोड़ 99 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह विशाल राशि योजना के संचालन, निगरानी और किसानों की फसलों में कीट नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने पर व्यय की जाएगी। इस पहल से लीची, आम, अमरूद, केला और पपीता जैसी महत्वपूर्ण बागवानी फसलों में सुरक्षित और समयबद्ध कीटनाशी छिड़काव सुनिश्चित होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होगी। यह योजना किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
