मार्गशीर्ष अमावस्या 2025: पितरों को प्रसन्न कर घर-आंगन खुशियों से भरें
ज्योतिषियों के अनुसार, वर्ष 2025 में आने वाली मार्गशीर्ष अमावस्या (अगहन अमावस्या) के दिन कई अत्यंत मंगलकारी संयोग निर्मित हो रहे हैं। इन शुभ योगों में विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक करने से साधकों को उनकी मनोवांछित अभिलाषाओं की पूर्ति होगी। इसके साथ ही, जीवन के सभी प्रकार के कष्टों और संकटों से मुक्ति प्राप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र दिन पर किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है, जिसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।
मार्गशीर्ष अमावस्या का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। पंचांग के अनुसार, अगहन का महीना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और यह मास जगत के पालनहार को ही समर्पित होता है। इस पूरे महीने में प्रतिदिन भगवान कृष्ण की आराधना की जाती है। वहीं, इस माह में आने वाली मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। इस शुभ तिथि पर की गई पूजा से व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण होती है और मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इसके विपरीत, मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ पितरों का तर्पण विशेष रूप से किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस शुभ तिथि पर पवित्र गंगा नदी में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से प्रत्येक व्यक्ति पितृ ऋण के भार से मुक्त हो जाता है।
यदि आप भी अपने पितरों का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक उनका तर्पण करें। तर्पण करते समय देवी मां गंगा के नामों का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके लिए कुछ मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ फलदायक होता है, जैसे: ‘ॐ विष्णुपादसंभूतायै नमः’ और ‘ॐ हिमाचलेन्द्रतनयायै नमः’। इन मंत्रों के जाप से पितर प्रसन्न होते हैं और घर-आंगन खुशियों से भर जाता है।
