मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर: पितरों की कृपा प्राप्ति का शुभ दिन
आज, 20 नवंबर 2025, मार्गशीर्ष माह की अमावस्या के रूप में मनाई जा रही है। यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और इस दिन किए गए श्राद्ध, तर्पण तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए किए गए उपाय उन्हें प्रसन्न करते हैं, जिससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस विशेष दिन पर कुछ शुभ और अशुभ योग भी बन रहे हैं, जिनका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। आज का पंचांग बताता है कि अमावस्या तिथि दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। इसके साथ ही, शोभन योग प्रातः 09 बजकर 53 मिनट तक मान्य है। नाग करण दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद किम्स्तुघ्न करण 21 नवंबर की रात्रि 01 बजकर 32 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। अमावस्या के दिन स्नान-दान और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सूर्योदय प्रातः 06 बजकर 48 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त सायं 05 बजकर 26 मिनट पर होगा। आज चंद्रोदय नहीं होगा, वहीं चंद्रास्त सायं 05 बजकर 13 मिनट पर होगा।
राहुकाल का समय भी आज के पंचांग में महत्वपूर्ण है। राहुकाल, जो कि एक अशुभ समय माना जाता है, आज दोपहर 02 बजकर 52 मिनट से 04 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी शुभ कार्य को करने से बचने की सलाह दी जाती है। कुल मिलाकर, मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन पितरों को प्रसन्न करने, दान-पुण्य करने और भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए एक उत्तम अवसर है।
