लखनऊ मेट्रो को करोड़ों का घाटा, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: UP Metro पर उठे गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना (UP Metro) में बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रबंधन संबंधी अनियमितताओं का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट ने परियोजना के संचालन और अनुबंधों में कई गंभीर गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिसका सीधा असर जनता के पैसे पर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक 38.66 लाख यात्रियों का अनुमान लगाया गया था, जबकि वास्तव में केवल 2.70 लाख यात्रियों ने ही मेट्रो सेवा का उपयोग किया। यात्रियों की संख्या में इस भारी अंतर के कारण मार्च 2019 से 2023-24 तक परिचालन से अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो सका, जिससे परियोजना को करोड़ों का घाटा हुआ।
सीएजी रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी ने अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में 11.50 प्रतिशत कम दर पर अनुबंध होने के बावजूद 75.30 करोड़ रुपये की राशि वसूल नहीं की। इसके अतिरिक्त, यंत्र एवं संयंत्र के लिए 31.74 करोड़ रुपये और ठेकेदारों को 14.01 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान किया गया। लाइसेंसधारकों को अनुबंध शर्तों के उल्लंघन के बावजूद 1.15 करोड़ रुपये की छूट दी गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जुलाई 2019 से अगस्त 2022 के बीच 17.42 लाख रुपये का अतिरिक्त विद्युत प्रभार वसूला गया, जिसे न तो शासकीय खाते में जमा किया गया और न ही संबंधित डिस्कॉम को दिया गया। शेड्यूल-ई के तहत 15.75 करोड़ रुपये में पूरा होने वाला कार्य 51.40 करोड़ रुपये में कराया गया, जिसका विस्तृत विवरण कंपनी उपलब्ध नहीं करा पाई। विज्ञापन अधिकारों के मामले में भी अनियमितता पाई गई, जहां 12 सेट ट्रेनों के लिए विज्ञापन लाइसेंस देने के बावजूद शुल्क की वसूली नहीं की गई। 3.16 करोड़ रुपये की रॉयल्टी और खनिज मूल्य की कटौती भी लंबित रही।
डिपो निर्माण के लिए खरीदी गई 25.80 हेक्टेयर भूमि में से 1.983 हेक्टेयर भूमि विवादित थी, फिर भी उस पर निर्माण कार्य किया गया। पटरियों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर की जांच में डिपो और मुख्य लाइन पर पटरियों की ब्रिनेल कठोरता संख्या भारतीय रेलवे मानकों से कम पाई गई। फेज-1 परियोजना से महानगर स्टेशन को बिना केंद्र सरकार की अनुमति के हटाना भी डीपीआर और वित्तीय अनुबंधों का उल्लंघन बताया गया है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में परियोजना के वित्तीय अनुशासन, अनुबंध प्रबंधन और जवाबदेही तय करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।
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