बहराइच में LPG gas crisis: ग्रामीण क्षेत्रों के ढाबे बंद, छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर संकट
बहराइच जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति में भारी कमी के कारण छोटे होटल और ढाबा संचालकों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस की किल्लत के चलते हाईवे, सड़कों के किनारे और कस्बों के बाजारों में संचालित कई छोटे प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर हैं। इस संकट का सबसे अधिक असर उन छोटे दुकानदारों पर पड़ा है जिनकी आजीविका पूरी तरह से इन व्यवसायों पर निर्भर है।
गैस की कमी के कारण कई ढाबा संचालक अपने प्रतिष्ठान चलाने में असमर्थ हो गए हैं। कुछ लोग मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं, लेकिन अब अधिकांश लोगों को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की आदत नहीं रही है। इसके अलावा, लकड़ी और कोयला भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
गैस संकट का असर खाने-पीने की चीजों के दामों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जो चाय 10 रुपये प्रति कप मिलती थी, वह अब 15 रुपये में बिक रही है। इसी तरह समोसे की कीमत भी 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये प्रति पीस हो गई है। पहले जो नाश्ता 20 रुपये में मिल जाता था, अब उसके लिए लोगों को करीब 30 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
गैस की कमी के कारण कई दुकानों में मिठाइयों का बनना भी लगभग बंद हो गया है। इससे मिठाई विक्रेताओं को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो हालात और खराब हो सकते हैं।
