अलीगढ़ की पराग पेंट्स एंड केमिकल्स का लाइसेंस निलंबित, मिलावटी पेट्रोल सप्लाई का खुलासा
अलीगढ़ की पराग पेंट्स एंड केमिकल्स फर्म का लाइसेंस जिला प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। यह फर्म मिलावटी पेट्रोल और डीजल की अंतर्राज्यीय सप्लाई में संलिप्त पाई गई है। बीते नवंबर माह में उत्तर प्रदेश एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
मिलावट का खेल
इस फैक्ट्री से मिलावटी पेट्रोल की सप्लाई फिरोजाबाद, हापुड़, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में की जाती थी। उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन लखनऊ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रदेश में मिलावटी पेट्रोल-डीजल सप्लाई की शिकायत की थी, जिसके बाद यूपी एसटीएफ को जांच सौंपी गई थी। 14 नवंबर 2025 को एसटीएफ ने फिरोजाबाद के पास एक टैंकर पकड़ा, जिसमें से आठ लीटर मिलावटी पेट्रोलियम पदार्थ बरामद हुआ।
फर्म पर छापेमारी और नमूना संग्रह
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि मिलावट का यह खेल अलीगढ़ की पराग पेंट्स एंड केमिकल्स फर्म से संचालित हो रहा था। इसके बाद जिला आपूर्ति विभाग और एसटीएफ ने संयुक्त रूप से आगरा रोड स्थित फर्म पर छापेमारी की। फर्म से 21 नमूने एकत्र कर लैब टेस्टिंग के लिए भेजे गए। फर्म के पास सॉल्वेंट, रिफिनेट, स्लॉप और नेफ्था के विक्रय का लाइसेंस था।
लाइसेंस निलंबन के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संजीव रंजन के अनुमोदन पर जिला पूर्ति अधिकारी सत्यवीर सिंह ने पराग पेंट्स एंड केमिकल्स का लाइसेंस निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, फर्म के कन्हैया वार्ष्णेय, भागीदार गौरव वार्ष्णेय और चित्रा वार्ष्णेय द्वारा निलंबन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गई है। आपूर्ति विभाग ने फर्म को पिछले चार महीनों (1 जुलाई से 14 नवंबर 2025) का स्टॉक और बिक्री रजिस्टर कार्यालय में जमा करने का अल्टीमेटम दिया है।
मुनाफे के लिए मिलावट
एसटीएफ की पूछताछ में मास्टरमाइंड पवन गिरी ने बताया था कि वह ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अलीगढ़ स्थित कन्हैया लाल वार्ष्णेय की पराग पेंट्स एंड केमिकल फैक्ट्री से मिलावटी तेल लेता था। फैक्ट्री में पेट्रोल, डीजल में अन्य पेट्रोलियम पदार्थों को मिलाकर घनत्व (डेन्सिटी) को कम-ज्यादा किया जाता था। कन्हैया लाल इसे 70-75 रुपये लीटर में पवन गिरी को बेचता था, जो आगे इसे 80-85 रुपये लीटर में पंप संचालकों को बेचता था।
जनता पर प्रभाव
इस तरह की मिलावट से न केवल आम जनता को वाहनों में भारी नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक है। मिलावटी ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब हो सकते हैं और प्रदूषण का स्तर भी बढ़ सकता है।
