लता मंगेशकर का वो गीत, जो 65 साल पहले पाकिस्तानी स्कूल की प्रार्थना बना
स्वर कोकिला लता मंगेशकर का 6 फरवरी को निधन हो गया था, जिसके बाद पूरा देश शोक में डूब गया। उन्होंने अपने सात दशकों के बेमिसाल करियर में 30,000 से भी अधिक गाने गाए, जिनमें से पहला गीत उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में 1942 में रिकॉर्ड किया था। भारत में उनकी लोकप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी उन्हें किस कदर सराहा जाता था, यह जानकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है।
लता मंगेशकर सिर्फ भारत की ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में संगीत प्रेमियों की चहेती थीं। भारत की प्रतिष्ठित गायिका होने के अलावा, उन्हें पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इतना स्नेह मिला कि वहां के एक स्कूल ने उनके एक प्रसिद्ध गीत को अपनी प्रार्थना के रूप में अपना लिया। यह अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है, जो उनकी आवाज़ की सार्वभौमिक अपील को दर्शाती है।
बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि लता मंगेशकर का कालजयी गीत ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ एक पाकिस्तानी स्कूल में स्कूल एंथम के तौर पर बजाया जाता था। यह गीत 1957 में रिलीज हुई फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ का हिस्सा था, जिसे मूल रूप से महान संगीतकार वसंत देसाई ने कंपोज किया था। इस गाने के बोल इतने मार्मिक और प्रेरणादायक हैं कि यह आज भी हर सुनने वाले के दिल को छू जाते हैं।
65 साल पहले गाया गया यह गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक और लोकप्रिय है। यह घटना लता मंगेशकर की असीम प्रतिभा और उनकी आवाज़ की सरहदों से परे पहुंच को साबित करती है। उनकी आवाज़ का जादू ऐसा था कि वह भाषाओं और राष्ट्रीयताओं की सीमाओं को तोड़कर सीधे दिलों में उतर जाती थी। यह कहानी न केवल लता जी की वैश्विक ख्याति को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि कला और संगीत में कितनी शक्ति होती है, जो लोगों को एकजुट कर सकती है, भले ही वे अलग-अलग देशों से हों।
