लोनी में बेटियों के ‘कातिल’ पल रहे: भ्रूण लिंग परीक्षण का चौंकाने वाला खुलासा
गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण का धंधा तेजी से फलफूल रहा है, जो हरियाणा और दिल्ली की बेटियों के भविष्य पर गहरा संकट पैदा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा और दिल्ली से बड़ी संख्या में महिलाएं लोनी आकर इस अवैध जांच को करवा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई सख्ती के बावजूद, यह गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
जानकारी के अनुसार, लोनी में लिंग परीक्षण का जाल इतना फैल चुका है कि इसे भेदना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह अवैध धंधा अक्सर बंद पड़े मकानों और गोदामों में संचालित किया जा रहा है, जहां से लिंग परीक्षण की सुविधाएं दी जा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस काम में 10वीं पास युवा भी शामिल हैं, जो मोबाइल वैन में रखी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों की मदद से लिंग की जांच कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने इसी साल जनवरी में 50 से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटरों को नोटिस जारी किया था, क्योंकि इन पर भ्रूण की जांच किए जाने की सूचना मिली थी। विभाग नोटिस देने के बाद संबंधितों के खिलाफ ठोस कार्रवाई के लिए निगरानी कर रहा है। वहीं, हरियाणा की स्वास्थ्य टीमें आए दिन लोनी में आकर छापेमारी करती रहती हैं। इसके बावजूद, गाजियाबाद का स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर कृत्य से बेखबर नजर आता है।
सूत्रों का कहना है कि हरियाणा के लोगों के बीच लोनी भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए कुख्यात हो गया है। यही कारण है कि सोनीपत, पानीपत, फरीदाबाद और रोहतक जैसे जिलों की टीमें गुप्तचरों की मदद से यहां छापा मार कार्रवाई करती रहती हैं। कई बार इन टीमों को स्थानीय लोगों के बीच फंसने पर पुलिस की मदद से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ता है। लोनी में आए दिन भ्रूण मिलने की घटनाएं भी इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती हैं।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, पीसीपीएनडीटी (भ्रूण लिंग निदान निषेध अधिनियम) के तहत प्रदेश में कुल 44 स्थानों पर छापेमारी की गई है, जिसमें 44 एफआईआर दर्ज की गईं और 35 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। विशेष रूप से लोनी में, हरियाणा की टीमों ने 16 बार छापे मारे हैं और लोनी के विभिन्न पुलिस थानों में कुल 24 एफआईआर दर्ज की गई हैं। जिले में कुल 363 पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं, जबकि लोनी में केवल 35 पंजीकृत केंद्र हैं। पीसीपीएनडीटी के तहत कोर्ट में 36 वाद दायर किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग संजोग ने कुदरत की देन के साथ छेड़छाड़ को महापाप बताया है। उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच करना, करवाना और इसमें सहयोग करना एक गंभीर अपराध है। पुत्र मोह के लालच में ऐसे अपराधों से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी ऐसी जांच की सूचना मिले तो स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर सहयोग करें।
