खरीफ सीजन में चावल का रिकॉर्ड उत्पादन, दलहन-तिलहन पर गिरी चिंता की छाया
भारत ने खरीफ 2025-26 सीजन में चावल के उत्पादन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर में समाप्त हुए इस सीजन में चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 12.45 करोड़ टन तक पहुँच गया है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन से 1.4 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।nnमंत्रालय के अनुमानों के मुताबिक, खरीफ 2025-26 सीजन में कुल अनाज उत्पादन 17.33 करोड़ टन रहने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16.95 करोड़ टन था। इस वृद्धि का श्रेय देश के कई हिस्सों में बेहतर मानसून को दिया जा रहा है, जिसने फसलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृषि मंत्री के अनुसार, कुछ इलाकों में अधिक बारिश का असर जरूर पड़ा, लेकिन कुल मिलाकर मानसून का रुख फसलों के लिए फायदेमंद रहा।nnहालांकि, चावल की बंपर पैदावार के बीच दलहन और तिलहन के उत्पादन में आई गिरावट चिंता का विषय है। खरीफ 2025-26 में दालों का उत्पादन घटकर 74 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 77 लाख टन था। इसी तरह, तूर दाल का उत्पादन 36.2 लाख टन से घटकर 35.9 लाख टन और उड़द का उत्पादन 13.4 लाख टन से घटकर 12 लाख टन रहने की आशंका है। तिलहन उत्पादन में भी कमी देखी जा सकती है, जिसके 280.2 लाख टन से घटकर 275.6 लाख टन रहने का अनुमान है। सोयाबीन उत्पादन में भी गिरावट की उम्मीद है, जो 152.6 लाख टन से कम होकर 142.6 लाख टन रह सकता है।nnयह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार दलहन और तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लक्ष्य पर जोर दे रही है। इन महत्वपूर्ण फसलों के उत्पादन में कमी से आयात पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है।nnइसके विपरीत, मक्के का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष के 248 लाख टन से बढ़कर 283 लाख टन तक पहुँच सकता है। मोटे अनाज का उत्पादन भी 414 लाख टन रहने का अनुमान है। गन्ने के उत्पादन में भी वृद्धि देखी जा रही है, जो 45.46 करोड़ टन से बढ़कर 47.56 करोड़ टन होने की संभावना है। हालांकि, कपास उत्पादन में मामूली गिरावट का अनुमान है, जो 297.2 लाख बेल्स से घटकर 292.1 लाख बेल्स रह सकता है। जूट और मेस्ता उत्पादन में भी कमी की आशंका है।nnकृषि मंत्रालय फसल वर्ष के लिए अंतिम आंकड़ों से पहले चार अग्रिम अनुमान जारी करता है, जो किसानों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।”
करते हैं। यह रिपोर्ट खरीफ सीजन की फसलों की स्थिति का एक प्रारंभिक संकेत देती है, जिस पर देश की कृषि अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर करती है।
