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खाद की कालाबाजारी से किसान बेहाल, रबी सीजन पर मंडराया संकट

By Nov 23, 2025

पताही प्रखंड में रबी सीजन की शुरुआत होते ही किसानों के सामने खाद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक खादों की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। खेत-खलिहानों का काम छोड़कर किसान खाद की दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें न तो समय पर खाद मिल रही है और न ही सरकारी दर पर।

किसानों के अनुसार, प्रखंड क्षेत्र में खाद की कई दुकानें हैं, और उनमें यूरिया व डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद दुकानदार उन्हें खाद न होने की बात कहकर टाल रहे हैं। किसानों का आरोप है कि दिन में खाद अनुपलब्ध बताई जाती है, जबकि रात के अंधेरे में कालाबाजारी के जरिए ऊंचे दामों पर बेची जा रही है।

किसानों ने बताया कि दुकानदार यूरिया को 370 से 400 रुपये प्रति बोरा तक बेच रहे हैं, जबकि इसका सरकारी मूल्य काफी कम है। इसी तरह, डीएपी की बोरी 1600 से 1700 रुपये में बेची जा रही है। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि जरूरत के अनुसार एक-दो बोरी खाद भी नहीं दी जा रही है, बल्कि दुकानदार अपनी मर्जी से सीमित मात्रा में मनमानी कीमतों पर खाद बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि दुकानदारों के गोदाम खादों से भरे पड़े हैं, लेकिन जानबूझकर इन्हें छिपाकर रखा जा रहा है ताकि बाद में इन्हें अधिक मुनाफे पर बेचा जा सके। इस स्थिति से किसानों में भारी आक्रोश है।

हालांकि, कुछ खाद विक्रेताओं ने किसानों के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि उनकी दुकानों में खाद की कोई कमी नहीं है और सभी प्रकार की खादें सरकारी निर्धारित दरों पर ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। विक्रेताओं के अनुसार, यूरिया 266 रुपये, डीएपी 1350 रुपये और पोटाश 1800 रुपये प्रति बोरा की दर से बेचा जा रहा है।

किसानों का कहना है कि खाद की इस किल्लत का सीधा असर रबी फसलों की बुआई और टॉप ड्रेसिंग दोनों पर पड़ रहा है। समय पर खाद न मिलने से रबी फसल की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और खाद की दुकानों पर सघन जांच अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जो भी दुकानदार कालाबाजारी में लिप्त पाए जाएं, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

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