केजीएमयू मजार विवाद: सांसद चंद्रशेखर ने डिप्टी सीएम को लिखी चिट्ठी, कहा- ऐतिहासिक मजारें न हटाएं
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित मजारों को हटाने के नोटिस ने विवाद खड़ा कर दिया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों ने केजीएमयू प्रशासन के इस कदम पर गहरी नाराजगी जताई है। केजीएमयू के क्वीनमेरी, रेस्पीरेटरी मेडिसिन, ट्रॉमा सेंटर और आर्थोपैडिक्स जैसे विभिन्न विभागों में मजारें स्थित हैं। हाल ही में कुछ हिंदू संगठनों ने इन मजारों पर आपत्ति जताते हुए अस्पताल परिसर में इनकी औचित्य पर सवाल उठाए थे। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने मजारों पर 15 दिनों के भीतर इन्हें हटाने का नोटिस चस्पा किया था, अन्यथा आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
इस नोटिस के विरोध में मुस्लिम धर्मगुरुओं के उतरने के बाद अब लोकसभा सदस्य चंद्रशेखर ने उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में आग्रह किया है कि केजीएमयू परिसर में स्थित ऐतिहासिक दरगाह शाहमीना शाह, हजरत हाजी हरमैन और अन्य मजारों को न हटाया जाए। सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन मजारों को हटाने के लिए जारी नोटिस से उलेमाओं, दरगाह कमेटी और आम नागरिकों में गहरी चिंता और रोष है। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि ये दरगाहें और मजारें केजीएमयू की स्थापना से भी पहले से मौजूद हैं। हजरत हाजी हरमैन की दरगाह की नींव 15वीं सदी (1426 ईस्वी) में रखी गई थी, जबकि केजीएमयू की स्थापना 1912-13 में हुई थी। उस समय नुजूल विभाग ने दरगाहों और केजीएमयू परिसर की स्पष्ट सीमाएं तय की थीं।
सांसद चंद्रशेखर ने जोर देकर कहा कि केजीएमयू प्रशासन इन ऐतिहासिक मजारों को अवैध बताकर हटाने या क्षति पहुंचाने की कोई भी कार्रवाई न करे, क्योंकि यह ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है। उन्होंने इसे संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता, आस्था और सामाजिक सौहार्द के मूल सिद्धांतों के भी प्रतिकूल बताया। उन्होंने उप मुख्यमंत्री से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है कि केजीएमयू परिसर में स्थित सभी ऐतिहासिक और वक्फ में दर्ज दरगाहों व मजारों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए और किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण या क्षति पहुंचाने वाली कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। इस मामले में प्रशासन का हस्तक्षेप सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
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