कारीसाथ आरोग्य मंदिर: कागजों पर डॉक्टर, हकीकत में ‘भगवान भरोसे’ मरीज, सुविधाओं का घोर अभाव
उदवंतनगर के कारीसाथ में स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) जिसे अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर कहा जाता है, अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कागजों पर तो यहां तीन डॉक्टर पदस्थापित हैं, लेकिन हकीकत में वे सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) उदवंतनगर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नतीजतन, यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक आयुष डॉक्टर के सहारे चल रहा है।
यह केंद्र उदवंतनगर, मुफ्फसिल और बिहिया प्रखंडों के सीमावर्ती क्षेत्र में होने के कारण यहां मरीजों की संख्या काफी अधिक रहती है। स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, कोरोना से पहले यहां रोजाना 100 से अधिक मरीज आते थे, लेकिन अब सुविधाओं के अभाव में यह संख्या घटकर 50 रह गई है। केंद्र में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। महीनों से खराब पड़ा चापाकल और शोपीस बन चुका आरओ प्लांट इसकी बदहाली की कहानी कहते हैं।
50 वर्षों से क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करा रहा यह केंद्र अब उपेक्षा का शिकार है। यहां पदस्थापित डॉक्टर निशांत, डॉ अविनाश और डॉ रंजीत की सेवाएं सीएचसी में ली जा रही हैं, जबकि पीरो के तार एपीएचसी से आए डॉ दिनकर पाण्डेय ही यहां एकमात्र डॉक्टर हैं। 30 प्रकार की जांच सुविधाओं के प्रावधान के बावजूद यहां केवल 12 प्रकार की जांच हो पाती है। यह स्थिति क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं।
