करोड़ों के कूड़ा सेंटर पर ताला: लापरवाही से ठप हुए 3 साल पुराने स्टेशन, शिफ्टिंग की तैयारी
शाहजहांपुर में स्वच्छता के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है, जहां नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए चार गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों में से दो पूरी तरह से अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। अहमदपुर निवाजपुर और न्यू सिटी ककरा में स्थित ये स्टेशन, जिन्हें तीन साल पहले बड़े तामझाम के साथ शुरू किया गया था, अब कूड़ा प्रबंधन के बजाय सरकारी धन की बर्बादी का प्रतीक बन गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन दोनों स्टेशनों का संचालन अप्रैल 2025 के बाद से टेंडर बंद होने के कारण ठप है। अधिकारियों की निष्क्रियता का आलम यह है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए ये ढांचे आज कूड़ा प्रबंधन के उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे हैं। इन स्टेशनों में लगे कॉम्पैक्टर भी खराब बताए जा रहे हैं, जिससे उनकी उपयोगिता और भी कम हो गई है।
हालांकि, फायर स्टेशन के पास स्थित ट्रांसफर सेंटर पर तीन कॉम्पैक्टर काम कर रहे हैं, और बरेली मोड़ स्थित केंद्र में एक कॉम्पैक्टर सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन दो प्रमुख स्टेशनों के बंद होने से शहर में कूड़ा उठान की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। निगम भले ही अपने स्तर पर कूड़ा उठान का दावा करे, लेकिन इन स्टेशनों के अनुपयोगी होने से इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अहमदपुर निवाजपुर का इलाका अब वीआईपी क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है, जहां दुकानों और आवाजाही में वृद्धि हुई है। इस कारण से, निगम ने कूड़ा स्टेशन को बंद कर जगह खाली करने का निर्णय लिया है। वहीं, ककरा केंद्र के पास पहले से मौजूद ट्रांसफर स्टेशन का संचालन भी संभव नहीं हो सका था।
शहर की गलियों में कूड़े के ढेर और इन महत्वपूर्ण स्टेशनों के बंद पड़े ढांचे, स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत को दर्शाते हैं। यह स्पष्ट है कि नगर निगम न तो समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर सका और न ही योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सफल रहा। इसका सीधा खामियाजा शहरवासी गंदगी के रूप में भुगत रहे हैं, और निगम के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि अहमदपुर निवाजपुर तथा ककरा स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बना ली गई है। उन्होंने बजट संबंधी जानकारी न होने की बात कही, और बताया कि निर्माण विभाग की ओर से इनकी स्थापना कराई गई थी। यह स्थानांतरण प्रक्रिया निगम की असफलता को छुपाने का एक और प्रयास मानी जा रही है।
