कोल्हान विवि की रैंकिंग सुधार पर जोर, कुलपति ने गुणवत्ता और रिकॉर्ड को बताया अहम
कोल्हान विश्वविद्यालय ने अपनी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारियों, विभागाध्यक्षों और डीन को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट ग्रेड प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान और प्रशासनिक दक्षता के हर स्तर पर उल्लेखनीय काम करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) जैसी मूल्यांकन प्रणालियों में सबसे मजबूत आधार विश्वविद्यालय के दस्तावेज होते हैं।
कुलपति ने कहा कि सभी अधिकारियों को अपनी कार्य-योजनाएं तुरंत तैयार करनी चाहिए, ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी मापदंडों को पूरा किया जा सके। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए दीक्षा समारोह की सफलता के लिए पूरी टीम को बधाई दी और समारोह से संबंधित सभी दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से संग्रहित करने का निर्देश दिया।
कार्यशाला के दूसरे चरण में, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के निदेशक डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने विश्वविद्यालय में अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने NAAC के तीसरे चक्र के लिए तैयार किए गए ब्लूप्रिंट को साझा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की है। उन्होंने आगे की योजनाओं को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया, ताकि सभी मूल्यांकन मापदंडों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। इसके बाद, कार्यशाला में NAAC के सात मुख्य मापदंडों पर केंद्रित विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, छात्र-शिक्षक अनुपात, अवसंरचना और सीखने के संसाधन जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल थे।
कार्यशाला के समापन पर कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के आयोजन विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट NAAC ग्रेड और बेहतर NIRF रैंकिंग प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। वर्तमान में विश्वविद्यालय बी ग्रेड पर है, और आगामी सत्र में इस स्थिति को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल उसकी अकादमिक प्रतिष्ठा को बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों को बेहतर शैक्षिक अवसर प्रदान करने में भी सहायक होगा।
