वैश्विक विवादों से कानपुर का निर्यात प्रभावित, वेनेजुएला संकट से बढ़ी निर्यातकों की चिंता | global trade
विश्वभर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण कानपुर के निर्यातकों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई ने निर्यातकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी महाद्वीप के कई देशों में होने वाला global trade प्रभावित हो सकता है। हालांकि कानपुर से सीधे वेनेजुएला को निर्यात नहीं होता, लेकिन मैक्सिको, ब्राजील, कोलंबिया और गुयाना जैसे पड़ोसी देशों को जाने वाले माल पर इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव की आशंका है। निर्यातकों को यह जानने की उत्सुकता है कि उनका माल कितना सुरक्षित है और किन-किन देशों में व्यापार बाधित हो सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष जैसे पुराने विवादों के साथ-साथ चीन और वियतनाम के बीच चल रहा तनाव भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रहा है। इन विवादों के कारण जॉर्डन, मिस्र और इजरायल जैसे देशों को होने वाला निर्यात पहले ही काफी कम हो चुका है। उदाहरण के लिए, इजरायल को सैडलरी और डायमंड ज्वेलरी का निर्यात मध्य-पूर्व एशिया के तनाव के कारण घट गया है, जबकि मिस्र को होने वाला निर्यात एक तिहाई रह गया है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ भी कानपुर के निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिससे लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित हो रहा है। पाकिस्तान और यूक्रेन को निर्यात कई वर्षों से बंद है, और ईरान को चावल का सीधा निर्यात भी वर्तमान में रुका हुआ है।
वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई और वहां के राजनीतिक हालात बिगड़ने के बाद, उत्तर कोरिया ने भी विश्वयुद्ध की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ गई है। कानपुर से अमेरिकी महाद्वीप के देशों में जाने वाला अधिकांश निर्यात अक्सर वेनेजुएला के रास्ते से होकर गुजरता है। इस स्थिति में, वेनेजुएला के पूर्व में गुयाना, दक्षिण में ब्राजील और पश्चिम में कोलंबिया जैसे देशों को माल भेजने वाले निर्यातक सबसे अधिक परेशान हैं। वे अपने माल की स्थिति और संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।
एक व्यापारिक संगठन के अधिकारी ने बताया कि वैश्विक विवादों का निर्यात पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि सीधे वेनेजुएला को निर्यात नहीं होता, लेकिन उसके आसपास के देशों को भेजे गए माल को लेकर निर्यातक परेशान हैं। हालांकि, इस वर्ष यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, ओमान और चार यूरोपीय देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों ने निर्यातकों के लिए कुछ नए अवसर भी खोले हैं।
