कानपुर किडनी कांड: डॉ. रोहित बेहोश करता, दिल्ली का डॉ. अली निकालता किडनी, फ्लाइट से आती थी टीम
कानपुर किडनी कांड में गिरफ्तार किए गए गाजियाबाद के ओटी टेक्नीशियनों राजेश कुमार और कुलदीप ने पुलिस को अहम जानकारी दी है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट डॉ. रोहित मरीजों को बेहोश करने का काम करता था। वहीं, दिल्ली के द्वारिका निवासी डॉ. अली किडनी निकालने और उसे प्रत्यारोपित करने का विशेषज्ञ था। डॉ. अली अपनी टीम में एक अन्य डॉक्टर, दो असिस्टेंट और खुद को मिलाकर चलता था। पुलिस अब इन डॉक्टरों की तलाश में जुटी है, हालांकि ओटी टेक्नीशियन डॉ. रोहित के बारे में अधिक जानकारी नहीं दे सके।
राजेश कुमार, जो सर्वोदय हास्पिटल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ओटी मैनेजर है, ने बताया कि उसकी मुलाकात तीन साल पहले वैशाली हास्पिटल में एक सेमिनार के दौरान डॉ. रोहित से हुई थी। डॉ. रोहित ने उसकी विशेषज्ञता को देखते हुए साथ काम करने का प्रस्ताव दिया था। राजेश और कुलदीप सिंह राघव, डॉ. रोहित के एजेंडे पर विश्वास करके उसके साथ काम करने को राजी हो गए थे।
राजेश के अनुसार, जनवरी से अब तक वे लोग किडनी ट्रांसप्लांट के पांच ऑपरेशन कर चुके थे। ऑपरेशन करने वाले मुख्य सर्जन दिल्ली के द्वारिका निवासी डॉ. अली थे, जिनके साथ डॉ. सैफ और असिस्टेंट अखिलेश व शैलेंद्र भी काम करते थे। सर्वोदय अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि राजेश नौकरी छोड़ चुका था और बुधवार को उसका आखिरी दिन था।
पुलिस के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली डॉक्टरों की टीम फ्लाइट से कानपुर आती थी। इस फ्लाइट का खर्च भी ऑपरेशन करवाने वाले से वसूले जाने वाले पैकेज में शामिल होता था। आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन करने वाली आठ डॉक्टरों की टीम विशेष फ्लाइट से आती थी। ऑपरेशन पूरा होने के बाद, खासकर जब यह आधी रात को खत्म होता था, तो टीम सड़क मार्ग से कार द्वारा वापस लौटती थी। एक बार पांच लोगों की टीम लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे पर उतरी थी, जहां से एक स्थानीय कार चालक उन्हें ले गया था। चालक से पूछताछ में पता चला कि कार में बैठे लोग दमन दीव के ट्रिप की बात कर रहे थे, जिससे उनकी पहचान और पुख्ता करने में मदद मिली।
