कनाडा में खालिस्तानी गुटों का उत्पात, तिरंगे का अपमान और भारत विरोधी नारे
कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी समूहों की भारत विरोधी गतिविधियां एक बार फिर सामने आई हैं। कनाडा की राजधानी ओटावा में ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) नामक संगठन ने एक अनौपचारिक जनमत संग्रह का आयोजन किया, जिसमें खालिस्तानी समर्थकों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने न केवल भारत विरोधी नारे लगाए, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का भी अपमान किया। सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों ने भारतीय नेताओं और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धमकियां भी दीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री और कनाडाई प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात हुई थी, जिसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।
‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) एक ऐसा संगठन है जिसे भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित कर रखा है और इसे एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है। यह संगठन पंजाब को भारत से अलग कर एक स्वतंत्र खालिस्तान राष्ट्र बनाने की मांग करता रहा है। SFJ का दावा है कि ओटावा में आयोजित जनमत संग्रह में कनाडा के विभिन्न प्रांतों से 53,000 से अधिक कनाडाई सिखों ने भाग लिया और वोटिंग के लिए दो किलोमीटर लंबी कतारें देखी गईं।
SFJ के महासचिव गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इस आयोजन को संबोधित किया और भारत सरकार के प्रयासों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब हजारों लोग मतदान के लिए कतार में थे, तब कनाडाई प्रधानमंत्री का भारतीय प्रधानमंत्री से मिलना उचित नहीं था।
यह घटना कनाडा में खालिस्तानी तत्वों द्वारा भारत के प्रति लगातार शत्रुतापूर्ण रवैये को दर्शाता है। हालांकि कनाडा सरकार ने इन गतिविधियों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस तरह के आयोजन भारत और कनाडा के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं। भारत सरकार ने हमेशा ऐसे अलगाववादी आंदोलनों का विरोध किया है जो देश की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देते हैं।
