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किस्मत को दी मात: कम्पाउंडर पिता ने बच्चों को बनाया डॉक्टर और इंजीनियर

By Nov 25, 2025

महम के वार्ड 13 में किराये के मकान में रहने वाले संजय मित्तल ने यह साबित कर दिखाया है कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी घुटने टेक देते हैं। खुद डॉक्टर बनने का अधूरा सपना उन्होंने अपने बच्चों के माध्यम से पूरा किया है। उनकी बेटी डॉ. ईशा मित्तल और बेटा डॉ. राहुल मित्तल आज डॉक्टर हैं, जबकि सबसे छोटा बेटा कर्ण मित्तल दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। यह सफलता उस परिवार की है जिसने आर्थिक तंगी को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।

संजय मित्तल का बचपन संघर्षों से भरा था। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने एक निजी अस्पताल में कम्पाउंडर के तौर पर काम शुरू किया। पिछले 30 वर्षों से वे इसी पद पर कार्यरत हैं। संजय बताते हैं कि जिस दिन उन्होंने पढ़ाई छोड़ी थी, उसी दिन यह प्रण लिया था कि उनके बच्चे मजबूरी में अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने ओवरटाइम काम किया, कर्ज लिया और अपनी जरूरतें कम करके बच्चों की शिक्षा पर हर संभव खर्च किया। वे कहते हैं कि भले ही वे अपना घर न बना पाए हों, लेकिन उन्होंने अपने तीनों बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव रखी है। उनकी पत्नी पूनम ने भी इस सफर में उनका पूरा साथ दिया।

बड़ी बेटी डॉ. ईशा मित्तल ने 2020 में पीएमटी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 181 हासिल की और पीजीआइएमएस रोहतक में सरकारी सीट पर एमबीबीएस में दाखिला लिया। वर्तमान में वे अपनी इंटर्नशिप कर रही हैं। ईशा अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग को देती हैं और कहती हैं कि लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करने से सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि घर पर रहकर ऑनलाइन तैयारी से भी सफलता पाई जा सकती है, इसके लिए बड़े शहरों में जाकर कोचिंग लेना अनिवार्य नहीं है।

बेटे राहुल मित्तल ने 2022 में पीएमटी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 189 प्राप्त की और वर्तमान में पीजीआइ रोहतक में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष में अध्ययनरत हैं। राहुल का मानना है कि बारहवीं तक की पढ़ाई के दौरान फोन और टीवी का प्रयोग सीमित रखना चाहिए और एक बार लक्ष्य तय करने के बाद पूरी लगन से उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सबसे छोटे बेटे कर्ण मित्तल ने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में सरकारी सीट पर दाखिला लिया है।

संजय की पत्नी पूनम ने बताया कि उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास किया। वे सुबह चार बजे उठकर बच्चों को जगातीं, नाश्ता तैयार करतीं और रात में 11-12 बजे तक उनके साथ जागकर उनकी पढ़ाई में मदद करतीं। उन्होंने बच्चों से कहा था कि जिस दिन वे सब सफल हो जाएंगे, उसी दिन वे चैन की सांस ले पाएंगी।

संजय मित्तल ने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए कभी घर बनाने की नहीं सोची। उन्होंने जरूरत पड़ने पर कर्ज लिया, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना चाहिए, टेलीविजन का सीमित प्रयोग करना चाहिए और उन्हें गलत संगत से बचाना चाहिए। यह परिवार उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं।

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