कौन होते हैं बीएलओ? मतदाता सूची के कामों में इनकी भूमिका और पात्रता जानें
देशभर के विभिन्न राज्यों में इन दिनों स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसके चलते बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) चर्चा का विषय बने हुए हैं। ये अधिकारी मतदाता सूची को अपडेट रखने और चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बीएलओ का पूरा नाम ‘बूथ लेवल ऑफिसर’ है, जिसे हिंदी में ‘बूथ स्तर अधिकारी’ कहा जाता है। ये आमतौर पर स्थानीय सरकारी या अर्ध-सरकारी कर्मचारी होते हैं, जिन्हें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची से संबंधित विभिन्न कार्यों के संपादन के लिए नियुक्त किया जाता है। नियमानुसार, बीएलओ को उसी क्षेत्र का निवासी होना चाहिए जहां उन्हें नियुक्त किया जाता है, ताकि वे स्थानीय मतदाताओं और उनके पते से अच्छी तरह परिचित हो सकें।
बीएलओ की जिम्मेदारियां काफी विस्तृत होती हैं। उनका प्राथमिक कार्य मतदाता सूची को अद्यतन रखना है। इसमें नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ना, मतदाताओं के पते में बदलाव या किसी मतदाता के मृत होने की स्थिति में उनका नाम सूची से हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियानों का संचालन करना, नए वोटर आईडी कार्ड वितरण में सहायता करना और फॉर्म-6, 7, 8 जैसे मतदाता संबंधी विभिन्न फॉर्म भरने की प्रक्रिया में नागरिकों की मदद करना भी इनकी अहम जिम्मेदारी है। मतदान दिवस से कुछ दिन पहले, बीएलओ अपने क्षेत्र के सभी मतदाताओं तक उनकी मतदाता पर्ची पहुंचाने का कार्य भी करते हैं, जिससे मतदाताओं को मतदान केंद्र की जानकारी आसानी से मिल जाती है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, बीएलओ के पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति को उस निर्वाचक नामावली के भाग में निर्वाचक के रूप में नामांकित होना चाहिए जो उसके प्रभार के अधीन है। शिक्षकों के अलावा, अन्य सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारियों की एक सूची भी है जिन्हें बीएलओ के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि बीएलओ के पद पर योग्य और विश्वसनीय व्यक्तियों की नियुक्ति हो, जो निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
हाल ही में, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले छह बीएलओ को सम्मानित भी किया गया, जो उनके समर्पण और मेहनत को दर्शाता है। हालांकि, कभी-कभी ऐसी भी खबरें आती हैं जहाँ बीएलओ की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाते हैं, जैसे कि वाराणसी की एक घटना में, जहाँ एक मतदाता के फोन करने पर बीएलओ ने कहा कि ‘बूथ से आकर अपना फॉर्म लो’। यह घटना दर्शाती है कि जहाँ अधिकांश बीएलओ निष्ठापूर्वक कार्य करते हैं, वहीं कुछेक मामलों में जवाबदेही और कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता बनी रहती है।
