कासगंज के गंगा-भागीरथ वन: सुंदर, पर पहुंचना जोखिम भरा
जनपद कासगंज में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक पर्यटन के दो प्रमुख केंद्र, गंगा वन और भागीरथ वन, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं। लाखों पौधों से सजे ये विशाल वन क्षेत्र न केवल जिले की वायु गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण और प्राकृतिक पर्यटन के लिए अपार संभावनाएं भी पैदा कर रहे हैं। हालांकि, इन हरित क्षेत्रों तक पहुंचने की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, जो इन वनों के विकास में बाधा बन रही है।
सोरों के दतलाना गांव से भागीरथ वन को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग पूरी तरह कच्चा है। पहले यह खड़ंजा मार्ग था, लेकिन अब वह टूट चुका है। बरसात और सर्दियों में रास्ते में जगह-जगह पानी भर जाने से चार पहिया वाहन से यहां पहुंचना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता है। इसी तरह, चंदनपुर घटियारी स्थित गंगा वन को जोड़ने वाला मार्ग भी कच्चा है। इन खराब रास्तों के कारण पर्यटक, स्थानीय निवासी और वन विभाग के कर्मचारी सभी को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। तस्वीरों में भी मार्ग पर जमा पानी और दलदली मिट्टी यात्रियों के लिए खतरे का स्पष्ट संकेत देती है।
यदि इन दोनों वनों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित नहीं की गई, तो ग्रामीण और प्राकृतिक पर्यटन के विकास की गति निश्चित रूप से प्रभावित होगी। वर्तमान में, गंगा वन में 1 लाख 11 हजार और भागीरथ वन में 3 लाख 51 हजार से अधिक पेड़ हैं, जिन्होंने क्षेत्र में माइक्रो-क्लाइमेट और जैव-विविधता को काफी समृद्ध किया है। इन प्राकृतिक संपदाओं का उपयोग नेचर ट्रेल, बर्ड वॉक, होम-स्टे, स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प जैसे रोजगार के अनेक अवसर विकसित करने में किया जा सकता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की आय और रोजगार में वृद्धि हो सकती है।
सोरों के गांव दतलाना के निवासी अनूप ने बताया कि प्रशासन को इन महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर पक्का (कंक्रीट या डामर) कराना चाहिए। उनका मानना है कि यदि सड़क, पार्किंग, सूचना केंद्र और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो गंगा वन और भागीरथ वन कासगंज के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय लोगों को व्यापक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास संभव होगा।
