कांशीराम आवास में 700 बेघर जरूरतमंदों को मिलेगा नया आशियाना
अंबेडकरनगर में बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए अच्छी खबर है। कड़ाके की सर्दी, झमाझम बरसात और चिलचिलाती धूप में सड़क या फुटपाथ पर तिरपाल लगाकर रात गुजारने वाले करीब 700 जरूरतमंदों को जल्द ही कांशीराम आवासीय कॉलोनी में सिर छिपाने के लिए एक छत मिलेगी। जिला प्रशासन और नगरीय निकाय ने मिलकर लंबे समय से इन आवासों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों को बाहर निकालने की कार्रवाई पूरी कर ली है।nnयह कांशीराम आवास वर्ष 2010 में बेघर गरीबों को आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से अकबरपुर नगर पालिका के कटरिया याकूबपुर, रतनपुर, बरवां नासिरपुर, शिवबाबा, गोविंद गनेशपुर व विजयगांव जैसे क्षेत्रों में बनाए गए थे। कुल 1,500 आवासों का निर्माण कराया गया था, जिन्हें जरूरतमंदों को आवंटित किया गया था। हालांकि, समय के साथ कई आवंटियों ने इन आवासों को किराए पर उठा दिया, जिससे जरूरतमंदों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा था।nnआवासीय कॉलोनी में अवैध रूप से रहने वालों की बढ़ती शिकायतों के बाद, स्थानीय सभासद की पहल पर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ल ने मामले का संज्ञान लिया। बीते 23 जुलाई को जिलाधिकारी ने सदर एसडीएम, अधिशासी अधिकारी, सीओ सिटी और नगर कोतवाल को मिलाकर पांच सदस्यीय टीम गठित की, जिसका कार्य आवासों की जांच करना था। इस टीम ने लगातार छापामारी अभियान चलाकर आवास आवंटन दस्तावेजों का सत्यापन किया।nnसत्यापन प्रक्रिया के दौरान, करीब 800 लोगों ने अपने आवास आवंटन के दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें से जांच में पात्रता पाई गई। हालांकि, 700 आवासों पर तीन दिन की चेतावनी नोटिस चस्पा करने के बावजूद उन्हें खाली नहीं किया गया। इसके बाद, नगरपालिका टीम ने ऐसे आवासों पर ताला जड़ दिया और अब नए सिरे से जरूरतमंदों के लिए आवंटन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।nnहालांकि, आवास आवंटन के लिए आवेदन प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन नगरीय निकाय का दावा है कि दिसंबर के दूसरे सप्ताह से आवेदन स्वीकार किए जाने लगेंगे। राजस्व विभाग और नगरपालिका मिलकर आवास आवंटन के लिए पात्रता मानक तैयार कर रहे हैं। अधिशासी अधिकारी बीना सिंह ने बताया कि अवैध कब्जा खाली कराने के बाद अब वास्तविक जरूरतमंदों को इन आवासों का लाभ मिलेगा। मानक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आवंटन किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि आवास उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”
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