एक छात्र की पहल से बरेली बना ‘क्लीन’, कारवां में जुड़े युवा
बरेली: ‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया…’ मजरूह सुल्तानपुरी की यह पंक्ति इंटरनेट के इस दौर में शहर को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठाने वाले युवाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जहां एक ओर डिजिटल दुनिया में मनोरंजन और अन्य प्रकार की सामग्री की भरमार है, वहीं बरेली के कुछ युवा हर रविवार अपना कीमती समय शहर की स्वच्छता के लिए निकाल रहे हैं। यह युवा न केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थलों से कूड़ा उठाते हैं, बल्कि धर्मस्थलों की सफाई भी करते हैं।
इस जन सरोकार की पहल की शुरुआत इज्जतनगर के आलोक नगर निवासी 23 वर्षीय भावेश सिंह ने की, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिजनेस इकोनॉमिक्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की शुरुआत में जूनागढ़ की यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि वहां के युवा गर्व के साथ पर्यटन और धर्मस्थलों की सफाई कर रहे थे। इस दृश्य ने उन्हें गहराई से प्रेरित किया और उन्होंने सोचा कि यदि वे कर सकते हैं, तो बरेली को भी स्वच्छ बनाया जा सकता है। गुरुग्राम में नौकरी के दौरान शहर में कूड़े के बढ़ते ढेर ने उन्हें और अधिक विचलित किया।
भावेश ने वर्क फ्रॉम होम के दौरान मार्च में अकेले ही शहर में सफाई शुरू की, हर रविवार दो घंटे का समय स्वच्छता को समर्पित किया। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से उनकी मुलाकात नवादा शेखान निवासी शिवम शर्मा से हुई। यहीं से ‘क्लीनअप बरेली’ नाम से एक पेज बनाया गया, जिस पर सफाई अभियानों के वीडियो पोस्ट किए जाने लगे। शुरुआत में, लोगों ने इसे नगर निगम का काम बताकर भावेश के प्रयासों पर सवाल उठाए और रिश्तेदारों ने भी उन्हें हतोत्साहित करने की कोशिश की। हालांकि, धीरे-धीरे लोगों का जुड़ाव बढ़ने लगा।
आज, इस टीम में 20 से 25 युवा सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जो हर रविवार दो घंटे शहर की स्वच्छता के लिए समर्पित करते हैं। वे इंस्टाग्राम पर लोगों से गंदे स्थानों के बारे में सुझाव भी लेते हैं, ताकि उन स्थानों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। शिवम शर्मा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले धर्मस्थलों से सफाई अभियान शुरू किया, जहां टूटी हुई मूर्तियां और पूजा सामग्री बिखरी रहती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खंडित मूर्तियों को फेंकना नहीं चाहिए, बल्कि उनका उचित विसर्जन किया जाना चाहिए।
अब यह टीम पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की सफाई भी कर रही है, और एकत्र किए गए कचरे को नगर निगम को सौंप देती है। टीम के सदस्य प्रेम गंगवार का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना गलत है, जबकि वे जो कर रहे हैं वह एक नेक काम है। इस सामूहिक प्रयास से बरेली की स्वच्छता में निश्चित रूप से सुधार हुआ है और यह अभियान आज भी जारी है, शहर को एक स्वच्छ और सुंदर स्थान बनाने के लक्ष्य के साथ।
