झारखंड शराब घोटाला 750 करोड़ पार, चार्जशीट न होने से 14 आरोपी रिहा
झारखंड में शराब घोटाला मामले में जांच जारी है, जिसकी राशि अब 750 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह घोटाला मूल रूप से 38 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान के मामले में दर्ज हुआ था।
इस मामले की खास बात यह है कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। इसके चलते गिरफ्तार किए गए 17 आरोपियों में से 14 को डिफ़ॉल्ट बेल मिल चुकी है। एक आरोपी को गोवा में ट्रांजिट बेल मिला था और वह फिलहाल फरार है।
जमानत पाने वालों में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और पूर्व उत्पाद आयुक्त सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित प्रकाश जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनके अलावा तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह, पूर्व महाप्रबंधक वित्त सुधीर कुमार दास, प्लेसमेंट एजेंसी मार्शन के स्थानीय प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया, होलोग्राम आपूर्ति कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी के विधु गुप्ता, श्री ओम साईं बेवरेजेज के अतुल कुमार सिंह, मुकेश मनचंदा, सुमित फसिलिटीज के निदेशक अमित प्रभाकर सुलौंकी, प्लेसमेंट एजेंसी विजन हास्पिटालिटी सर्विसेज के निदेशक परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर और महेश शिडगे को भी जमानत मिल चुकी है।
वर्तमान में मेसर्स मार्शन के निदेशक जगन तुकाराम देसाई और छत्तीसगढ़ के देसी शराब आपूर्ति करने वाले कारोबारी राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल जेल में हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ का एक अन्य कारोबारी नवीन केडिया गोवा में ट्रांजिट बेल मिलने के बाद से फरार है।
यह घोटाला सरकारी मानकों को पूरा नहीं करने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों को ठेका देने से शुरू हुआ, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ। इसके अलावा, नकली होलोग्राम की आपूर्ति और ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों को भुगतान जैसे आरोप भी इसमें शामिल हैं।
