झारखंड की पहली वेब सीरीज ‘साया’ आज रिलीज, डायन प्रथा के खिलाफ देगी सशक्त संदेश
झारखंड की धरती से सामाजिक परिवर्तन की एक अनूठी पहल सामने आई है। आज यूट्यूब पर ‘साया’ नामक एक नागपुरी मिनी हॉरर वेब सीरीज का पहला एपिसोड रिलीज हो रहा है। यह सीरीज अपने आप में खास है क्योंकि यह न केवल दर्शकों को डराने का काम करेगी, बल्कि समाज में आज भी व्याप्त टोनही और डायन प्रथा जैसी क्रूर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक सशक्त संदेश भी देगी।
‘साया’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण है। यह किसी बड़े फिल्म स्टूडियो या प्रोडक्शन हाउस की देन नहीं, बल्कि झारखंड के सुराकोचा और कोटा गांव के लगभग 100 ग्रामीणों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। इन ग्रामीणों ने मिलकर इस सीरीज को जमीन से आसमान तक पहुंचाया है। किसी ने अभिनय किया, किसी ने सेट सजाया, किसी ने वेशभूषा का इंतजाम किया तो किसी ने कैमरे की जिम्मेदारी संभाली। हर छोटे-बड़े काम में उनकी भागीदारी ने इसे ‘गांव द्वारा निर्मित फिल्म’ का एक बेमिसाल उदाहरण बनाया है।
साधनों की कमी के बावजूद, ग्रामीणों का जुनून और लगन अडिग रहा। महंगे कैमरे और उपकरण भले ही न हों, लेकिन कलाकारों की निष्ठा और मेहनत ने मोबाइल कैमरे से शूट की गई कहानी को भी जीवंत बना दिया। इस अनोखी पहल को साकार करने में टोप्पो लैब्स, एक ट्राइबल ब्रांड जो फूड, इंजीनियरिंग और आर्ट के क्षेत्र में सक्रिय है, का आर्थिक और तकनीकी सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उनके सहयोग से ही यह सपना हकीकत में बदल सका।
‘साया’ के कलाकारों और निर्माताओं को उम्मीद है कि इस सीरीज की रिलीज के बाद ऐसे और भी संवेदनशील निर्माता और प्रोडक्शन हाउस आगे आएंगे जो कला को समाज से जोड़ने वाले ऐसे सार्थक प्रयासों को अपना सहयोग देंगे। वर्तमान में, सुराकोचा और कोटा गांव में उत्सव का माहौल है। स्थानीय कलाकारों के लिए ‘साया’ सिर्फ एक वेब सीरीज नहीं, बल्कि अपनी पहचान, प्रतिभा और सामाजिक सरोकार का प्रतीक बन गई है। यह सीरीज झारखंड के ग्रामीण अंचल से उठकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का एक अनूठा प्रयास है।
