जर्मनी सेना का विस्तार: 2035 तक 2.60 लाख सैनिक, रूस को लेकर ‘प्लान’ तैयार
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरीस पिस्टोरियस देश की सैन्य शक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। यूरोप में रूस से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों के बीच, जर्मनी न केवल अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाना चाहता है, बल्कि महाद्वीप की सुरक्षा में भी एक बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है। इसी परिप्रेक्ष्य में, जर्मन संसद ने एक महत्वपूर्ण कानून को मंजूरी दी है, जिसके तहत 2035 तक सेना में सैनिकों की संख्या को वर्तमान से लगभग 50% बढ़ाकर 2,60,000 तक पहुंचाया जाएगा।
इस नई योजना के तहत, सेना में अधिक से अधिक युवाओं को आकर्षित करने के लिए सैनिकों को आकर्षक वेतन और ऐसी व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान की जाएगी, जो नागरिक जीवन में भी उपयोगी हो। योजना का एक अहम हिस्सा यह है कि सभी 18 वर्षीय पुरुषों को उनके स्वास्थ्य और फिटनेस की जानकारी देने के लिए एक फॉर्म भेजा जाएगा, ताकि संभावित सैन्य उम्मीदवारों की पहचान की जा सके। हालांकि, महिलाओं के लिए यह फॉर्म स्वेच्छा से भरने का विकल्प होगा।
यह कानून तत्काल प्रभाव से अनिवार्य सैन्य सेवा (ड्राफ्ट) को लागू नहीं करता है। लेकिन, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस जैसे संभावित खतरे से निपटने के लिए केवल स्वैच्छिक भर्ती पर्याप्त नहीं हो सकती है। यदि पर्याप्त संख्या में युवा स्वेच्छा से सेना में शामिल नहीं होते हैं, तो भविष्य में संसद द्वारा अनिवार्य भर्ती पर पुनर्विचार किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
जर्मनी में सेना के पुनर्गठन को लेकर एक गहरी सामाजिक झिझक भी मौजूद है, जिसका एक बड़ा कारण देश का इतिहास, विशेष रूप से नाजी काल का सैन्यवाद है। इस झिझक के चलते इस कानून को लेकर संसद में व्यापक बहस हुई। हालांकि, रक्षा मंत्री पिस्टोरियस इसे कई वर्षों में सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा सामाजिक परिवर्तन मानते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान पीढ़ी ने कभी भी वास्तविक युद्ध के खतरे का सामना नहीं किया है, इसलिए उन्हें भविष्य की किसी भी चुनौती के लिए तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई सेना शीत युद्ध के दौरान की सेना जितनी बड़ी नहीं होगी, जब जर्मनी के पास 5 लाख तक सैनिक थे।
रक्षा मंत्री पिस्टोरियस ने हाल के वर्षों में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जो कुछ साल पहले अकल्पनीय थे। इनमें सेना के खर्च पर लगे संवैधानिक प्रतिबंधों को हटाना शामिल है, जिससे अरबों यूरो के नए हथियार खरीदे जा सके। इसके अलावा, उन्होंने यूरोपीय देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी अपनी कोशिशें तेज की हैं।
पिस्टोरियस की सीधी और सरल संवाद शैली, सैनिकों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव और फील्ड में जाकर उनका मनोबल बढ़ाने की उनकी क्षमता ने उन्हें बेहद लोकप्रिय बनाया है। वे अक्सर सैनिकों को अप्रत्याशित पदोन्नति देकर या उनकी सराहना करके चौंका देते हैं, जो शायद पूर्व नेतृत्व के कार्यकाल में कम ही देखने को मिलता था।
