जोकीहाट विधानसभा: दो भाइयों के सियासी रण का रोमांच, कौन बनेगा विजेता?
डिजिटल डेस्क, जोकीहाट विधानसभा (अररिया)। बिहार की राजनीति में अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण और चर्चित हाट सीट के रूप में जानी जाती रही है। इस बार के विधानसभा चुनाव में यहां का सियासी रण और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और यहां एकछत्र राज करने वाले दिवंगत तस्लीमुद्दीन के दो पुत्र, शाहनवाज आलम और सरफराज आलम, आमने-सामने हैं। इस चुनाव में कुल आठ प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों भाइयों के बीच सिमट गया।
पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, दोनों भाई बिहार सरकार में राजद शासनकाल में मंत्री भी रह चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में, सरफराज आलम राजद के उम्मीदवार थे, जिन्हें उनके छोटे भाई शाहनवाज आलम ने एआईएमआईएम के टिकट पर पराजित कर सबको चौंका दिया था। यह हार सरफराज के लिए एक बड़ा झटका थी और इस बार वे जनसुराज पार्टी से मैदान में उतरकर उस हार का बदला लेने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं। यह चुनाव उनके लिए सिर्फ जीत-हार नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।
शुरुआती दौर में कई राजनीतिक विश्लेषकों को लग रहा था कि जनसुराज पार्टी यहां कुछ खास प्रभाव नहीं डाल पाएगी, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव प्रचार आगे बढ़ा, सरफराज आलम मतदाताओं को अपनी ओर खींचने में सफल रहे। अब उन्हें रेस में एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं, राजद के प्रत्याशी शाहनवाज आलम अपने पारंपरिक कोर वोट बैंक के दम पर जीत का दावा कर रहे हैं। इस बीच, एआईएमआईएम का जलवा भी इस क्षेत्र में बरकरार दिख रहा है, जो मुकाबले को और त्रिकोणीय बना सकता है।
इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी ने सभी को चौंका दिया है। जोकीहाट विधानसभा में 82 प्रतिशत महिला और 62 प्रतिशत पुरुष मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। महिला मतदाताओं के इस प्रचंड मतदान को पूर्व मंत्री और जदयू प्रत्याशी मंजर आलम अपने समर्थन में मान रहे हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में मतदान से सभी खेमों में खुशी है, लेकिन साथ ही यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि जीत-हार का अंतर बहुत कम रहने वाला है। एक-एक पल उम्मीदवारों, उनके समर्थकों और आम वोटरों के लिए भारी पड़ रहा है, क्योंकि सभी बेसब्री से यह जानने को बेताब हैं कि जोकीहाट की सियासी कुर्सी पर कौन काबिज होगा।
