जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला, हत्या मामले में तीन महिला आरोपियों को मिली जमानत
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने अनंतनाग के लारनू क्षेत्र में चरागाह भूमि को लेकर हुए हिंसक संघर्ष से जुड़े एक हत्या मामले में आरोपी तीन महिलाओं को जमानत दे दी है। यह फैसला सार्वजनिक सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 19 जुलाई, 2023 को अली मोहम्मद डार की मौत से जुड़ा है, जिनकी कथित तौर पर लाठियों से लैस आरोपियों के एक समूह ने पिटाई की थी। मृतक के पुत्र द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह घटना दो पड़ोसी परिवारों के बीच चरागाह भूमि पर मवेशी शेड के निर्माण को लेकर हुए विवाद के बाद हुई। जांच के बाद पुलिस ने चौदह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
निचली अदालत का फैसला और उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
तीनों महिला याचिकाकर्ताओं को जनवरी और मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था और वे विचाराधीन कैदी के रूप में न्यायिक हिरासत में थीं। उनकी जमानत याचिकाएं पहले अनंतनाग के प्रधान सत्र न्यायाधीश द्वारा खारिज कर दी गई थीं। हालांकि, उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। न्यायमूर्ति राहुल भारती ने कहा कि निचली अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437(1) के प्रावधान की अनदेखी की थी, जो विशेष रूप से गैर-जमानती अपराधों में भी महिला आरोपियों के लिए जमानत पर विचार करने का निर्देश देता है।
न्यायालय का तर्क और शर्तें
उच्च न्यायालय ने पाया कि एफआईआर और आरोपपत्र में लगाए गए आरोप अस्पष्ट थे और इनमें आरोपी महिलाओं की विशिष्ट भूमिकाएं स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई थीं। न्यायालय ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि कथित अपराध का हथियार लाठी था और हमले में महिलाओं की सटीक संलिप्तता परिभाषित नहीं थी। न्यायालय ने तीनों महिलाओं को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत और जमानत बांड जमा करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। उन्हें निचली अदालत की पूर्व अनुमति के बिना प्रदेश नहीं छोड़ने और मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कोई भी कार्य न करने की शर्त लगाई गई है।
