जम्मू-कश्मीर में 131 आतंकी सक्रिय, 122 पाकिस्तानी; लाल किला हमले से बढ़ी चिंता
दिल्ली के लाल किले में हुए हालिया धमाके ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में डॉक्टरों जैसे पेशेवरों की संलिप्तता ने सुरक्षा एजेंसियों को नई चुनौतियों से अवगत कराया है। घटना के बाद, जम्मू-कश्मीर में सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियां सक्रिय आतंकियों और उनके मददगारों की पहचान के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रही हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में इस समय 131 आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें से 122 पाकिस्तानी नागरिक हैं, जबकि केवल 9 स्थानीय निवासी हैं। यह आंकड़ा घाटी में आतंकवादियों की भर्ती प्रक्रिया में आए एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। स्थानीय युवाओं की भर्ती में कमी के बीच, ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकियों का उदय चिंताजनक है।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आतंकी संगठन अब स्थानीय युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने में नाकाम हो रहे हैं। इस कारण, वे अब पढ़े-लिखे और नौकरीपेशा युवाओं को निशाना बना रहे हैं। इन युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकवादी गतिविधियों के लिए लॉजिस्टिक्स, फंडिंग और भर्ती जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। ये ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी समाज में सामान्य प्रोफाइल बनाए रखते हुए गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं, जिससे वे और भी अधिक खतरनाक हो जाते हैं।
सुरक्षा बलों ने वर्ष 2025 में अब तक 45 आतंकवादियों को मार गिराया है। पिछले वर्ष, 2024 में कुल 61 आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से 45 घाटी में और 16 नियंत्रण रेखा पर मारे गए थे। मारे गए आतंकवादियों में 21 पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। वर्तमान में, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों पर दबाव बनाकर उन्हें खत्म करने की रणनीति पर काम हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और अंदरूनी इलाकों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई जारी है।
लाल किला हमले के बाद ‘व्हाइट-कॉलर’ नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को तेज कर दिया गया है। 10 नवंबर की घटना के बाद हुई जांच में यह बात सामने आई है कि इस मॉड्यूल में जम्मू-कश्मीर में प्रशिक्षित आतंकी भी शामिल थे। इसके बाद, केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे मॉड्यूल को ध्वस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी इकोसिस्टम को खत्म करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। दिल्ली ब्लास्ट मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस भी एक्शन में है और अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 200 से अधिक ठिकानों पर छापामारी की गई है।
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