जानबूझकर मौत को दावत: नशे में धुत, तेज रफ्तार और बेपरवाह ड्राइविंग से बढ़ रही मौतों की संख्या
सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लगातार चेकिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ जैसे प्रयोग भी किए गए, लेकिन जिले में बाइकों की टक्कर में सबसे अधिक लोगों की जान जा रही है। मंडल में एक जनवरी से 31 अक्टूबर तक हुई सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि बाइकों के बीच हो रही दुर्घटनाओं की मुख्य वजह शराब का सेवन कर ओवरस्पीड, ओवरटेकिंग और बिना हेलमेट के बाइक चलाना है।
इन गंभीर कारणों के अलावा, यातायात नियमों का उल्लंघन और सड़कों की खराब स्थिति भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों (ब्लैक स्पाट) में सुधारात्मक कार्यों के आदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार, यदि वाहन चालक संतुलित गति बनाए रखें और यातायात नियमों का पालन करें, तो असमय होने वाली मौतों को काफी हद तक टाला जा सकता है।
बरेली में हुई दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाइकों की टक्कर में सबसे अधिक 34 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। बाइक और कार के बीच हुई टक्कर में 33 लोगों की जान गई और 69 घायल हुए। कारों के बीच आमने-सामने की टक्कर में सात मौतें और 14 घायल हुए। बाइक और ट्रक के बीच हुई टक्कर में 28 लोगों की मौत हुई और 56 घायल हुए। कार की टक्कर से चार साइकिल सवारों की जान गई और 15 घायल हुए। नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं। जिले में एनएच पर 128 दुर्घटनाओं में 89 लोगों की जान गई और 156 घायल हुए।
बदायूं जिले में 89 बाइक दुर्घटनाओं में 55 लोगों की जान चली गई, जबकि 69 लोग घायल हुए। टेंपो, ई-रिक्शा से बाइक टकराने की 47 दुर्घटनाओं में 26 लोगों की मौत हुई और 38 घायल हुए। कार और बाइक के बीच हुई 97 दुर्घटनाओं में 72 लोगों की जान गई और 95 घायल हुए। कारों के आमने-सामने भिड़ंत की 42 दुर्घटनाओं में 26 लोगों की मौत हुई और 62 घायल हुए। 61 दुर्घटनाओं में कार ने पैदल चलने वालों को कुचला, जिनमें 32 लोगों की मौत हुई और 37 घायल हुए। इस जिले में सबसे अधिक 276 दुर्घटनाएं राजमार्ग पर हुईं, जिनमें 185 लोगों की मौत और 248 जख्मी हुए।
पीलीभीत जिला सड़क दुर्घटनाओं के मामले में सबसे ज्यादा संवेदनशील पाया गया है। यहां बाइकों की टक्कर में 52 लोगों की मौत हुई, जबकि 73 घायल हुए। ट्रक और बाइक के बीच हुई दुर्घटनाओं में 45 लोगों की जान गई और 32 घायल हुए। बाइकों की टक्कर से 18 पैदल यात्रियों की मौत हुई और 36 जख्मी हुए। कार से कुचलकर 16 लोगों की मौत हुई और 25 घायल हुए। नेशनल हाईवे पर 254 सड़क दुर्घटनाओं में 152 लोगों की मौत हुई और 208 घायल हुए। नेशनल हाईवे पर डिवाइडर नहीं होना दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण माना गया है। इसके अलावा, दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों की अत्यधिक गति भी दुर्घटनाओं को बढ़ा रही है। ओवरस्पीड के कारण 374 दुर्घटनाएं हुईं।
