आईटीबीपी जवान अमर सिंह को नम आंखों से विदाई, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
आईटीबीपी जवान अमर सिंह का हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। अमर सिंह के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव मारोली ले जाया गया, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी गई। गांव में शोक की लहर है और हर कोई उन्हें याद कर रहा है।
गांव मारोली निवासी व आईटीबीपी अर्धसैनिक बल में तैनात जवान अमर सिंह का शनिवार को हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे वर्तमान में अमृतसर में जीडी कांस्टेबल के रूप में सेवाएं दे रहे थे। करीब 28 वर्ष तक देश की सेवा करने वाले अमर सिंह (उम्र लगभग 53 वर्ष) का पार्थिव शरीर शनिवार देर शाम नोएडा से गांव पहुंचा।
रविवार सुबह उनके पैतृक गांव मारोली में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और ‘अमर रहे-अमर सिंह’ के नारों से वातावरण गूंज उठा।
अमर सिंह ने वर्ष 1997 में आईटीबीपी ज्वाइन किया था। इसके बाद वे देश के विभिन्न सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहे। स्वजन के अनुसार शनिवार सुबह अचानक उनकी हृदय गति रुक गई। पहले अमृतसर में चिकित्सकों को दिखाया गया, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर उन्हें नोएडा अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शनिवार देर शाम जब पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो रात होने के कारण अंतिम संस्कार नहीं किया गया। ग्रामीणों ने तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर का सम्मानपूर्वक स्वागत किया। रविवार सुबह स्वर्ग आश्रम में आईटीबीपी की टुकड़ी द्वारा गार्ड आफ आनर दिया गया। आईटीबीपी अधिकारी बलराज ने बताया कि अमर सिंह ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ जवान थे, उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा।
गांव के सरपंच भीम सिंह ने बताया कि अमर सिंह अपने पीछे माता-पिता के साथ भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो पुत्र हेमंत व मनीष तथा एक पुत्री मनेश है तीनों शादीशुदा हैं। पिता बुधराम ने नम आंखों से बताया कि उनका बेटा वर्षों से आईटीबीपी में तैनात रहकर देश की सेवा करता रहा और अचानक आए हार्ट अटैक ने उसे उनसे छीन लिया। इस दौरान मोरोली, दनचौली, धानौता, बसीरपुर, कारोली, कोरियावास और निजामपुर सहित कई गांवों से लोग अंतिम संस्कार में पहुंचे।
