Iran crisis: ईरान में फंसे Indian students, परिवारों ने कहा- एंबेसी मदद नहीं कर रही
ईरान में महंगाई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच वहां फंसे भारतीय छात्रों के परिवारों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। करीब 3,000 भारतीय छात्र, जिनमें से अधिकांश कश्मीर के हैं, तेहरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों के परिवार लगातार भारतीय दूतावास (एंबेसी) पर मदद न करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट बंद होने के कारण बच्चों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है और हॉस्टल में खाने-पीने की चीजों की कमी हो रही है।
कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले हिलाल अहमद भट की बेटी तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं। हिलाल बताते हैं कि वहां हालात बहुत खराब हैं और बेटी रोज परेशान हो रही है। उनके रिश्तेदार लगातार फोन करके बेटी की खैरियत पूछ रहे हैं। हिलाल के अनुसार, एंबेसी के अधिकारियों ने पहले बेटी का पासपोर्ट लिया था, लेकिन बाद में वापस कर दिया। एंबेसी ने बच्चों से अपने खर्च पर ईरान छोड़ने को कहा है।
छात्रों के परिवारों का कहना है कि महंगाई आसमान छू रही है। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को खाने-पीने की बहुत दिक्कत हो रही है। 250 ग्राम तेल की बोतल 300 से 400 रुपए में बिक रही है, जबकि एक किलो चावल की कीमत हजार रुपए तक पहुंच गई है। छात्रों के पास रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं।
श्रीनगर की रहने वाली रेहाना अख्तर की बेटी एलीजा भी तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं। रेहाना बताती हैं कि एंबेसी ने बच्चों पर दबाव बनाया है कि वे जल्द से जल्द अपने खर्च पर ईरान से निकल जाएं। बच्चों ने एंबेसी से एयरलिफ्ट करने की गुजारिश की, लेकिन अधिकारियों ने मना कर दिया। बच्चों के पास टिकट खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं और इंटरनेट बंद होने से परिवार भी टिकट बुक नहीं करा पा रहे हैं।
परिवारों ने सरकार से गुजारिश की है कि बच्चों को किसी भी तरह उनके बच्चों को ईरान से वापस लाया जाए। उनका कहना है कि सरकार चाहे तो रोज 10 फ्लाइटें चलाकर फंसे हुए लोगों को निकाल सकती है।
