कानपुर में ‘fake degree scam’ की जांच तेज, SIT ने बनाईं पांच टीमें
कानपुर में फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद अब इस मामले की गहन जांच शुरू हो गई है। शिक्षा के नाम पर हो रही इस धोखाधड़ी से छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के निर्देश पर गठित 14 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने इस पूरे ‘fake degree scam’ की तह तक जाने के लिए कमर कस ली है। एसआईटी को पांच अलग-अलग टीमों में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक को विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि जल्द से जल्द इस गिरोह का भंडाफोड़ किया जा सके।
एसआईटी की एक टीम इस फर्जी डिग्री गिरोह की जड़ों तक पहुंचने और इसके मास्टरमाइंड्स का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। दूसरी टीम बरामद की गई 900 से अधिक फर्जी डिग्रियों, अंकपत्रों और माइग्रेशन प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता की जांच करेगी, जो नौ राज्यों की 15 विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबंधित बताए जा रहे हैं। अन्य टीमें गिरफ्तारियों, सर्विलांस और आरोपियों से पूछताछ कर कड़ी से कड़ी जोड़ने का काम करेंगी ताकि एक मजबूत चार्जशीट तैयार की जा सके। एसआईटी पूर्व में हुए इसी तरह के फर्जी डिग्री मामलों की भी पड़ताल कर रही है और थानों से विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है।
मामले का खुलासा और गिरोह का नेटवर्क
किदवई नगर पुलिस ने गोशाला चौराहा स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन में छापा मारकर चार युवकों को फर्जी डिग्रियों के साथ गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे। जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा ने गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग काम सौंप रखे थे। अश्वनी मेडिकल डिग्रियां तैयार कराता था, जबकि नागेंद्र बीकॉम, बीएससी, एमएससी, एमबीए की डिग्रियां बनवाता था। जोगेंद्र एलएलबी और हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की मार्कशीट का काम देखता था। मयंक भारद्वाज अलीगढ़ की मंगलायतन यूनिवर्सिटी से, मनीष फरीदाबाद की लिंग्या यूनिवर्सिटी से और विनीत हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी से डिग्रियां उपलब्ध कराते थे। छतरपुर की श्रीकृष्ण विश्वविद्यालय का काम शुभम दुबे और गौतम संभालते थे, जबकि मणिपुर की एशियन यूनिवर्सिटी और ईंटानगर की हिमालयन यूनिवर्सिटी से डिग्रियां उपलब्ध कराने में शेखू उर्फ ताबिश और नागेंद्र शामिल थे।
अधिकारियों का बयान
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) संकल्प शर्मा ने बताया कि एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है और सभी टीमों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। उनका लक्ष्य है कि जल्द से जल्द इस पूरे प्रकरण का खुलासा किया जा सके। एसआईटी प्रमुख एडीसीपी योगेश कुमार ने यह भी बताया कि फर्जी डिग्री मामले से जुड़े अधिवक्ताओं के नामों का भी पता लगाया जा रहा है।
