ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ भड़के जन आंदोलन ने अब गंभीर रूप ले लिया है। पिछले 13 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन देश भर के 100 से अधिक शहरों में फैल चुका...
ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ भड़के जन आंदोलन ने अब गंभीर रूप ले लिया है। पिछले 13 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन देश भर के 100 से अधिक शहरों में फैल चुका है, जिससे हालात बेकाबू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरुद्ध कर आगजनी की है और “खामेनेई को मौत” तथा “इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ” जैसे जोशीले नारे लगाए हैं। कुछ जगहों पर निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में “यह आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे” के नारे भी गूंजे हैं।
इस हिंसक प्रदर्शनों के बीच, अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 45 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, और तेहरान एयरपोर्ट को भी बंद कर दिया गया है। सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जनता की नाराजगी का कारण
ईरान की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% तक की बढ़ोतरी ने आम लोगों, विशेषकर युवाओं (GenZ) को आक्रोशित कर दिया है। सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने इस नाराजगी को और बढ़ा दिया है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से देश गंभीर आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन से जूझ रहा है।
पहलवी की वापसी की मांग और अमेरिकी हस्तक्षेप
निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी, जो ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं, ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की है। वे ईरान के लिए एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखे जाते हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो अमेरिका उन्हें “बहुत जोरदार तरीके से निशाना बनाएगा”।
ईरान की वर्तमान आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव की मांग कर रहे हैं, और कई लोग 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की वकालत कर रहे हैं, ताकि देश में आर्थिक स्थिरता, व्यक्तिगत आजादी और वैश्विक स्वीकार्यता लौट सके।