इंडिगो संकट: बेंगलुरु एयरपोर्ट पर यात्रियों का हंगामा, सामान के लिए 10 घंटे तक भटकते रहे लोग; बैग फटे, दवाइयां गायब
बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात को भले ही अफरा-तफरी थोड़ी कम हो गई हो, लेकिन सैकड़ों फंसे हुए यात्रियों के लिए परेशानी जारी रही। इंडिगो लगातार फ्लाइट्स कैंसिल कर रहा था और यात्री 10 घंटे तक परेशान होकर पड़े हुए सामान के ढेरों में अपना सामान ढूंढते रहे। कुछ सामान खराब हो गया था, कुछ गायब था। रिफंड के भरोसे से भी उस तनाव में कोई कमी नहीं आई जो बिना किसी चेतावनी के सिस्टम के ठप होने से हुआ था।
धान्या रविंद्रन, जिनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई थी, उन्हें अपने सामान और शूटिंग के लिए जरूरी कैमरा गियर के लिए आठ घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैं इंडिगो के स्टाफ से पूछती रही, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि सामान कैसे मिलेगा। वे बस घंटों तक कहते रहे, ‘मैडम, प्लीज इंतजार कीजिए’।” आखिरकार, एयरपोर्ट के एक स्टाफ मेंबर की मदद से, उन्हें कन्वेयर टनल के पास एक छोटी सी जगह मिली और उन्होंने खुद ही अपना सामान बाहर निकाला। वहां बैग के ढेर लगे हुए थे।
इसी तरह, जयपुर जा रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर आरिफ खान को सात घंटे इंतजार के बाद अपना सूटकेस मिला। उन्होंने बताया, “मेरा बैग ऐसा लग रहा था जैसे उसे फेंका गया हो। पहिए टूटे हुए थे और कोई भी स्टाफ मेंबर यह नहीं बता पाया कि क्या हुआ? यह इंडिगो के ऑपरेशन के इतिहास में सबसे बुरी स्थिति है।”
24 साल की स्टूडेंट अंजना राम के लिए लंबा इंतजार घबराहट में बदल गया। उन्होंने बताया कि मेरे चेक-इन बैग में दवाइयां थीं। मैंने लगभग 9 घंटे इंतजार किया और स्टाफ से गुजारिश की कि इसे प्राथमिकता दें, लेकिन उन्होंने कहा कि वे अलग-अलग बैग को ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं। जब आखिरकार उनका सामान आया तो जिपर फटा हुआ था। सामान बाहर गिर रहा था। यह दिल तोड़ने वाला था।
यूके जाने वाले यात्री प्रकाश मेनन ने बताया कि लोग अपना सामान ढूंढने के लिए ढेरों पर चढ़ रहे थे। कोई सिस्टम नहीं था, कोई अनाउंसमेंट नहीं था, कोई लाइन मैनेजमेंट नहीं था। इतने बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए यह अविश्वसनीय था।
