भारतीय हॉकी गोलकीपर सविता पूनिया को पद्मश्री सम्मान, हरियाणा में जश्न का माहौल
भारतीय महिला हॉकी टीम की मजबूत दीवार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली गोलकीपर सविता पूनिया को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। रविवार शाम जारी हुई पद्मश्री पुरस्कारों की सूची में जैसे ही सविता पूनिया का नाम शामिल हुआ, वैसे ही उनके पैतृक गांव जोधकां सहित पूरे सिरसा जिले में खुशी की लहर दौड़ गई।
जोधकां गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाने वाली सविता पूनिया की इस उपलब्धि पर ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों में खासा उत्साह है। सविता के पिता महेंद्र पूनिया ने कहा कि वह इस खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते। यह सब उनकी बेटी की वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और भगवान की कृपा का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि सविता इन दिनों बेंगलुरु में 2026 वर्ल्ड कप क्वालिफायर की तैयारी में जुटी हुई हैं। जैसे ही पद्मश्री सूची की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत सविता को फोन कर यह खुशखबरी दी। पिता के अनुसार सविता ने कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें कभी पद्मश्री जैसे बड़े सम्मान से नवाजा जाएगा। उन्होंने इसे अपने माता-पिता, परिवार और देश के लिए गर्व का क्षण बताया।
महेंद्र पूनिया ने सरकार का आभार जताते हुए कहा कि इस सम्मान से न केवल उनकी बेटी का हौसला बढ़ा है, बल्कि इससे अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
सविता पूनिया टोक्यो ओलंपिक 2020 में शानदार गोलकीपिंग के चलते ‘द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर हुई थीं। उन्हें एशिया की बेस्ट गोलकीपर चुना जा चुका है और इससे पहले अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। वह सिरसा में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी रह चुकी हैं।
11 जून 1990 को जोधकां गांव में जन्मी सविता को उनके दादा रणजीत सिंह ने हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। शुरुआती प्रशिक्षण उन्होंने सिरसा की अग्रसेन नर्सरी और बाद में भारतीय हॉकी प्राधिकरण के हिसार सेंटर में लिया। 2007 में उनका चयन भारतीय सीनियर नेशनल हॉकी कैंप के लिए हुआ और 2011 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसके बाद सविता ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और निरंतर सफलता की नई ऊंचाइयों को छूती रहीं।
