Aligarh में आवासीय इलाकों का अवैध व्यावसायिक उपयोग, Supreme Court के आदेश से बढ़ी मुश्किल
अलीगढ़ में आवासीय कॉलोनियों का व्यावसायिक उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। शहर के कई प्रमुख रिहायशी इलाके, जिन्हें दशकों पहले आवासीय योजना के तहत विकसित किया गया था, अब पूरी तरह से व्यावसायिक हब बन चुके हैं। अवंतिका कॉलोनी और स्वर्ण जयंती नगर इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जहां एलआईजी, एचआईजी और एमआईजी आवासों में अब अस्पताल, बैंक, शोरूम और कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं।
यह स्थिति तब है जब अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (ADA) की महायोजना 2031 में शहर के भू-उपयोग को स्पष्ट रूप से आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में बांटा गया है। इसके बावजूद, 50 से अधिक ऐसे इलाके हैं जहां निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत गतिविधियां चल रही हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवासीय संपत्तियों के अवैध व्यावसायिक उपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसकी जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के अवैध बदलाव न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि शहरी नियोजन को भी प्रभावित करते हैं। इससे ट्रैफिक, पार्किंग और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अलीगढ़ विकास प्राधिकरण पर दबाव बढ़ गया है। प्राधिकरण ने पूर्व में भी स्वर्ण जयंती नगर में सर्वे कराया था और अवैध रूप से व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने वाले एक दर्जन से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए थे। संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्राधिकरण ने इन सभी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन इसके बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एडीए सचिव दीपाली भार्गव ने बताया है कि महायोजना 2031 के तहत निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत गतिविधियां संचालित करने वालों का सर्वे कराया जाएगा। प्राधिकरण की नियोजित कॉलोनियों में भी यह सर्वे होगा, जिसके बाद नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
