बेंगलुरु में इंसानियत शर्मसार! अस्पताल ने इलाज से किया इनकार, मरीज की मौत; क्या है कानून?
बेंगलुरु में हुई इस दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक मरीज को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल लाया गया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल ने उसे प्राथमिक उपचार देने से मना कर दिया। समय पर इलाज न मिलने के कारण मरीज की मौत हो गई। यह घटना सिर्फ एक लापरवाही नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की संवेदनहीनता को दर्शाती है।
इस मामले पर कानूनी और नैतिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और चिकित्सा नैतिकता के तहत, कोई भी अस्पताल आपातकालीन देखभाल से इनकार नहीं कर सकता। आपातकालीन स्थिति में, जीवन बचाना अस्पताल की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, भले ही मरीज के पास तत्काल भुगतान करने की क्षमता न हो।
नागरिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पतालों को लाभ कमाने की मानसिकता से बाहर निकलकर मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने आपातकालीन प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने और उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना शहरी भारत में एम्बुलेंस प्रतिक्रिया प्रणाली की दक्षता और ‘बाइस्टैंडर उदासीनता’ (bystander apathy) की समस्या को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों ने आम जनता को बुनियादी जीवन समर्थन (Basic Life Support) प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है ताकि ऐसी आपात स्थितियों में त्वरित सहायता मिल सके।
