रनियां में पीएनजी की कीमतों में भारी उछाल, 55% तक प्रभावित हुआ उद्योगों का उत्पादन
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण रनियां में औद्योगिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। औद्योगिक व्यवसायिक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की कीमतों में अचानक हुई वृद्धि, एलपीजी की किल्लत और कच्चे माल की सीमित उपलब्धता ने उत्पादन को 55 फीसदी तक प्रभावित किया है। इससे मांग-आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।
बढ़ती कीमतों से उद्यमी परेशान
रनियां के उद्यमियों के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में औद्योगिक पीएनजी की कीमत में दो से तीन बार बढ़ोतरी हुई है। प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एससीएम) कीमत 58 रुपये से बढ़कर पहले 60, फिर 75 और अब 98 रुपये तक पहुंच गई है। संसाधनों की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण उद्योगों का संचालन कठिन हो गया है। यदि जल्द ही राहत नहीं मिली, तो उत्पादों की कीमतों में भी भारी वृद्धि की आशंका है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
श्रमिकों का पलायन और उत्पादन पर असर
इस बीच, गेहूं की कटाई और बीमारी का हवाला देकर श्रमिक भी बड़ी संख्या में अपने घर लौट रहे हैं। रनियां औद्योगिक क्षेत्र के लगभग 35 फीसदी मजदूर पहले ही जा चुके हैं, और जो बचे थे वे भी अब छुट्टी मांग रहे हैं। प्लास्टिक, लोहा, रिफाइनरी और साबुन बनाने वाली लगभग 60 फीसदी फैक्ट्रियों के उत्पादन पर इसका असर पड़ रहा है। कई इकाइयां पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं, लेकिन बैंकों के कर्ज और आपूर्तिकर्ताओं के डर से वे इसकी घोषणा भी नहीं कर पा रही हैं। प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली लगभग 100 इकाइयों में से 60 बंद हैं। लोहे के उत्पाद बनाने वाली 100 फैक्ट्रियों में से 45 कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से बंद हैं। साबुन बनाने वाली 20 फैक्ट्रियों में से पांच से अधिक और होजरी की 25 फैक्ट्रियों में से 13 बंद हो चुकी हैं। सीमा के जोनल चेयरमैन हरदीप सिंह राखरा ने बताया कि विषम परिस्थितियों से राहत की उम्मीद में मुनाफा घटाकर कारोबार किया जा रहा है, लेकिन अब यह लंबे समय तक संभव नहीं है। स्थिति सामान्य न होने पर खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी।
