उत्तर प्रदेश में Anganwadi, Asha Workers का बढ़ेगा मानदेय, CM योगी ने विधान परिषद में किया ऐलान
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की लाखों आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में ऐलान किया कि इन महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाएगा। यह कदम इन वर्कर्स के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उनके योगदान को मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जिसका सीधा असर ग्रामीण स्वास्थ्य और बाल विकास सेवाओं पर पड़ेगा।
सीएम योगी ने यह भी बताया कि सरकार शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही है, और उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया गया है। इससे पहले, मुख्यमंत्री विधानसभा में निराश्रित और वृद्धा पेंशन बढ़ाने की घोषणा भी कर चुके हैं।
विपक्ष पर सीएम योगी का हमला
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का विकास जेपीएनआईसी, गोमती रिवर फ्रंट और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं में देखा जा सकता है, जो उनके अनुसार भ्रष्टाचार का प्रतीक थीं। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि सपा संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रही है और समाज में विद्वेष फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सपा को कांग्रेस से सबक लेने की सलाह देते हुए कहा कि यदि उनका रवैया नहीं बदला तो विधान परिषद और विधानसभा में उनकी भी वही स्थिति हो जाएगी, जो कांग्रेस की हुई है।
उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति
विधान परिषद में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ का मार्ग अपनाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत ‘विकसित भारत’ के आह्वान का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने सभी तीर्थों के विकास का कार्य किया है और आज उत्तर प्रदेश की पहचान दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव जैसे भव्य आयोजनों से है। उन्होंने राज्य की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2017 तक यूपी की जीडीपी 13 लाख करोड़ थी, जो भाजपा सरकार बनने के बाद महज आठ साल में बढ़कर 23 लाख करोड़ हो गई है। सीडी रेश्यो 45 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत हुआ है, और उत्तर प्रदेश आज एक रेवेन्यू सरप्लस राज्य है।
कृषि क्षेत्र में बदलाव और किसान सशक्तिकरण
किसानों को लेकर सीएम योगी ने कहा कि अब अन्नदाता हमारी पहचान हैं। उन्होंने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने किसानों को उत्पादक से उपभोक्ता बना दिया था, जबकि अब किसान फिर से उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले कृषि के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी, लेकिन अब लागत कम और उत्पादन ज्यादा हो रहा है। किसान अब उद्यमी बन रहे हैं और गाँव की महिलाएं ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कृषि विकास दर 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई है। कुल कृषि भूभाग केवल 11 प्रतिशत होने के बावजूद, यूपी 21% खाद्यान्न उत्पन्न कर रहा है। पीएम किसान निधि से 15,000 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित की गई है।
FPO, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से किसान की उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक के साथ ‘यूपी AGREES’ प्रोजेक्ट भी चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने गो-संरक्षण पर भी जोर दिया, बताया कि अब गो-हत्या और गो-तस्करी पर रोक लगी है। आज 7,727 गो-आश्रय स्थल हैं, जिनमें 16 लाख से अधिक गोवंश हैं। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में यूपी अग्रणी राज्य है। पिछले 8 साल में 3,06,000 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है और 122 चीनी मिलें सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं, जो पिछली सरकारों के कुल भुगतान से 60,000 करोड़ रुपये अधिक है।
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